श्री विजयपुरम्, 29 नवम्बर (PTI) — सरकार जल्द ही अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में नेशनल कोरल रीफ रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRRI) की स्थापना करेगी, जो भारत का पहला समर्पित प्रवाल भित्ति अनुसंधान केंद्र होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
120 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला NCRRI देश में प्रवाल भित्तियों से जुड़े सभी अनुसंधान कार्यों के लिए केंद्रीय एवं निगरानी एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इसे दक्षिण अंडमान के चिड़ियाटपू में स्थापित करेगा।
ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ZSI) के अंडमान एवं निकोबार क्षेत्रीय केंद्र के प्रभारी अधिकारी शिवपेरुमल ने शुक्रवार को “द्वीपीय पारितंत्र की तटीय और समुद्री जैव विविधता” विषय पर आयोजित कार्यशाला के दौरान कहा,
“यह प्रवाल भित्ति अनुसंधान, संरक्षण और प्रबंधन का एक उन्नत केंद्र होगा।”
उन्होंने प्रवाल भित्तियों के पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं, तटों को तूफ़ानों के प्रभाव से बचाती हैं और जन–धन की हानि को कम करने में मदद करती हैं।
शिवपेरुमल ने यह भी बताया कि श्री विजयपुरम् स्थित ZSI संग्रहालय में एक नया QR कोड आधारित सिस्टम शुरू किया जाएगा, जिससे आगंतुक विभिन्न प्रजातियों की तस्वीरें और विवरण डिजिटल रूप से देख सकेंगे।
पूर्व ZSI निदेशक कैलाश चंद्रा ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत के चार प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है, जहाँ बड़ी संख्या में देशज और प्रवासी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। उन्होंने समुद्र स्तर में वृद्धि और तापमान बढ़ने से समुद्री आवासों, विशेष रूप से प्रवाल भित्तियों, पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया।
चंद्रा ने यह भी बताया कि सरकार जैव विविधता प्रेमियों को नई खोजी गई प्रजातियों के नामकरण का अवसर दे रही है तथा कृषि को द्वीपीय जैव विविधता से जोड़ने की दिशा में कदम उठा रही है।
इस तीन दिवसीय कार्यशाला में भारतीय तटरक्षक बल, INS जरावा, भारतीय सेना और अंडमान-निकोबार पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों के 20 कर्मियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला शनिवार को संपन्न हुई।
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