अगले पांच वर्षों में वास्तविक रूप से 6-8 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था: वैष्णव

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Jan. 21, 2026, Union Minister Ashwini Vaishnaw, left, meets Meta's Chief Global Affairs Officer Joel Kaplan on the sidelines of the World Economic Forum, in Davos, Switzerland. (@AshwiniVaishnaw/X via PTI Photo)(PTI01_21_2026_000104B) *** Local Caption ***

दावोस, 21 जनवरी (पीटीआई) — केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि मध्यम मुद्रास्फीति और मजबूत आर्थिक गतिविधियों के सहारे भारत अगले पांच वर्षों में वास्तविक रूप से 6-8 प्रतिशत और नाममात्र रूप से 10-13 प्रतिशत की दर से वृद्धि करता रहेगा।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान सीआईआई और ईवाई के सहयोग से आयोजित ‘बेट ऑन इंडिया – बैंक ऑन द फ्यूचर’ सत्र में बोलते हुए वैष्णव ने अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम टावर स्थापित करने का औसत समय 270 दिनों से घटकर केवल सात दिन रह गया है, जबकि 89 प्रतिशत अनुमतियां शून्य समय में मिल रही हैं।

उन्होंने नीतिगत मंशा और उसके क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के रूप में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नौकरशाही राजनीतिक दिशा के अनुरूप काम करे।

वैष्णव ने उद्योग जगत के बीच चुनौतियों के बेहतर संवाद की जरूरत पर भी बल दिया और अमेरिका तथा यूरोप में डेटा लोकलाइजेशन मानकों के मानकीकरण का उल्लेख किया।

सीआईआई अध्यक्ष और ईवाई अफ्रीका-इंडिया क्षेत्र के रीजनल मैनेजिंग पार्टनर तथा ईवाई ग्रोथ मार्केट्स काउंसिल के चेयर राजीव मेमानी ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे कम देशों में शामिल है, इसलिए 2047 तक इसे कम से कम पांच गुना बढ़ाने की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में उन्होंने भारत की व्यापारिक रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्य पूर्व, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और यूनाइटेड किंगडम जैसे क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौते तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। उन्होंने श्रम सुधारों और जीएसटी लागू करने जैसे घरेलू सुधारों का भी उल्लेख किया, जिनसे उपभोक्ता खाद्य उत्पादों पर कर की दरें कम हुई हैं।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता, विखंडन और तेज तकनीकी बदलावों से गुजर रही है। ऐसे में भारत एक ऐसे बाजार के रूप में उभरता है, जो आकार, स्थिरता और दीर्घकालिक अवसर प्रदान करता है।”

इस गोलमेज चर्चा में वैश्विक वित्त और बैंकिंग, बीमा और पुनर्बीमा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म, औद्योगिक स्वचालन, मोबिलिटी और परिवहन, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, खाद्य एवं पेय पदार्थ, रसायन और उपभोक्ता वस्तुएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा समाधान और सीमा-पार भुगतान जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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