
न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन, 2 दिसंबर (PTI) — अमेरिका ने कहा है कि वह अपनी सालभर की G20 अध्यक्षता के दौरान समूह को उसकी “मुख्य भूमिका”—आर्थिक विकास और वैश्विक समृद्धि को आगे बढ़ाने—पर वापस केंद्रित करेगा, जिसमें नियामक सुधार, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी।
अमेरिका ने 1 दिसंबर से आधिकारिक रूप से G20 की अध्यक्षता संभाल ली है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका “G20 को उसकी मूल मिशन—आर्थिक विकास और समृद्धि—पर वापस ले जाएगा ताकि ठोस परिणाम हासिल किए जा सकें।”
बयान में कहा गया, “इन आवश्यक सुधारों को आगे बढ़ाते हुए हम तीन मुख्य विषयों को प्राथमिकता देंगे—नियामक बोझ को कम करके आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देना, किफायती और सुरक्षित ऊर्जा सप्लाई चेन को मजबूत करना, और नई तकनीकों व नवाचारों को विकसित करना।”
अमेरिका 2026 में फ्लोरिडा के मियामी में G20 लीडर्स समिट की मेजबानी करेगा, जो देश के 250वें स्थापना वर्ष के आयोजन के साथ मेल खाएगी।
अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका से अध्यक्षता संभाली, लेकिन ट्रंप ने पिछले महीने जोहांसबर्ग में आयोजित शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण अफ्रीका को 2026 में मियामी में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के लिए निमंत्रण नहीं दिया जाएगा।
ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने जोहांसबर्ग समिट में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि दक्षिण अफ्रीका ने अफ्रीकानर्स और डच, फ्रेंच तथा जर्मन मूल के बाशिंदों के खिलाफ कथित “भीषण” मानवाधिकार उल्लंघनों को स्वीकार करने व संबोधित करने से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा था, “G20 के समापन पर, दक्षिण अफ्रीका ने हमारे अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधि को अध्यक्षता सौंपने से इनकार कर दिया, जो क्लोजिंग सेरेमनी में मौजूद थे। इसलिए, मेरे निर्देश पर दक्षिण अफ्रीका को 2026 G20 के लिए निमंत्रण नहीं दिया जाएगा।”
ट्रंप ने यह भी कहा था कि दक्षिण अफ्रीका ने साबित किया है कि वह “किसी संगठन की सदस्यता के योग्य नहीं है, और हम तत्काल सभी भुगतान और सब्सिडी बंद कर रहे हैं।”
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने ट्रंप की टिप्पणियों को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया था।
दक्षिण अफ्रीका ने 1 दिसंबर 2024 को G20 की एक वर्ष की अध्यक्षता संभाली थी, भारत के बाद। जोहांसबर्ग में 22–23 नवंबर को आयोजित शिखर सम्मेलन पहली बार अफ्रीकी महाद्वीप पर आयोजित G20 समिट था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने जोहांसबर्ग समिट में हिस्सा लिया था, ने कहा था कि यह “सफल” बैठक एक समृद्ध और टिकाऊ ग्रह के निर्माण में योगदान देगी।
G20 या समूह-20 एक अंतर-सरकारी मंच है जिसमें 19 देश, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शामिल हैं।
परंपरा के अनुसार, मेजबान देश प्रतीकात्मक लकड़ी का गैवल (हथौड़ा) अगले अध्यक्ष देश को सौंपता है। लेकिन अमेरिका की ओर से कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद नहीं था क्योंकि उसने सम्मेलन का बहिष्कार किया था।
अमेरिका दूतावास से एक प्रतिनिधि भेजना चाहता था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने इसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति रामाफोसा को “कनिष्ठ अधिकारी” को यह सौंपना “अपमानजनक” होगा।
बाद में दक्षिण अफ्रीिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा कि चूंकि अमेरिका ने समिट में हिस्सा नहीं लिया, इसलिए G20 अध्यक्षता के दस्तावेज़ अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी को देश के विदेश मंत्रालय (DIRCO) मुख्यालय में “औपचारिक रूप से” सौंप दिए गए।
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