
वॉशिंगटन, 18 दिसंबर (एपी) — ट्रंप प्रशासन ने ताइवान को 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के हथियारों की एक बड़ी बिक्री पैकेज की घोषणा की है, जिसमें मध्यम दूरी की मिसाइलें, होवित्ज़र तोपें और ड्रोन शामिल हैं। इस कदम पर चीन ने नाराजगी जताई है।
स्टेट डिपार्टमेंट ने बुधवार देर रात इन हथियार सौदों की घोषणा की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रव्यापी प्रसारित संबोधन में विदेश नीति पर बहुत कम बात की और चीन या ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया।
घोषित आठ हथियार सौदों में 82 हाई-मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) और 420 आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत 4 अरब डॉलर से अधिक है। इसके अलावा, 60 स्वचालित होवित्ज़र सिस्टम और उससे संबंधित उपकरण 4 अरब डॉलर से अधिक के हैं, और ड्रोन की कीमत 1 अरब डॉलर से अधिक है।
अन्य बिक्री में 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का सैन्य सॉफ्टवेयर, जैवलिन और TOW मिसाइलें 700 मिलियन डॉलर से अधिक की, हेलीकॉप्टर स्पेयर पार्ट्स 96 मिलियन डॉलर की और हार्पून मिसाइल रिफर्बिशमेंट किट 91 मिलियन डॉलर की शामिल हैं।
स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि ये बिक्री “अमेरिका के राष्ट्रीय, आर्थिक और सुरक्षा हितों को सुदृढ़ करती हैं” और इससे ताइवान को अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण और रक्षात्मक क्षमता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह चीन-अमेरिका कूटनीतिक समझौतों का उल्लंघन है, चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाता है और क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करता है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने हथियार सौदे के लिए अमेरिका का आभार जताया और कहा कि इससे ताइवान में पर्याप्त आत्मरक्षा क्षमताएं सुनिश्चित होंगी और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता बनी रहेगी।
ताइवान की सरकार ने रक्षा खर्च को अगले साल 3.3% और 2030 तक 5% जीडीपी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने हाल ही में 40 अरब डॉलर का विशेष रक्षा बजट भी घोषित किया है।
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