
बीजिंग, 12 फरवरी (पीटीआई) चीन ने रेयर अर्थ (दुर्लभ मृदा) धातुओं पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह कदम अमेरिका द्वारा भारत समेत 50 से अधिक देशों के साथ मिलकर इन बहुमूल्य खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने और बीजिंग पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के जवाब में उठाया गया है।
इस सप्ताह की शुरुआत में चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने जियांग्शी प्रांत के गानझोउ का दौरा किया, जो भारी रेयर अर्थ तत्वों के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में से एक है। ये तत्व उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहां उन्होंने कहा कि चीन को रेयर अर्थ जैसे उद्योगों में अपनी बढ़त और मजबूत करनी चाहिए, जहां उसे वॉशिंगटन पर रणनीतिक बढ़त हासिल है।
सरकारी मीडिया के अनुसार, ली ने चीनी विज्ञान अकादमी के गानजियांग इनोवेशन अकादमी का भी दौरा किया, प्रमुख खनिज उत्पादकों से मुलाकात की और स्थानीय उद्योगपतियों तथा शोधकर्ताओं के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा, “उन्नत विनिर्माण और हरित, निम्न-कार्बन परिवर्तन को बढ़ावा देने में रेयर अर्थ की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।”
वैश्विक स्तर पर इन खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में चीन का वर्चस्व हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ बन गया है, जिससे अमेरिका के साथ व्यापार और प्रौद्योगिकी विवादों में उसे बढ़त मिलती है।
चीन वैश्विक रेयर अर्थ खनन का लगभग 70 प्रतिशत और उनके प्रसंस्करण का करीब 90 प्रतिशत नियंत्रित करता है।
ये खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरणों और आधुनिक गैजेट्स के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
बीजिंग ने अपने व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए इन प्रमुख तत्वों के निर्यात पर रोक लगाई थी। चीन ने अपने इस दबदबे का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऊंचे शुल्क कम करने और ‘क्विड प्रो क्वो’ समझौते पर सहमत होने के लिए मजबूर किया, जिसके तहत बीजिंग ने वॉशिंगटन को रेयर अर्थ की आपूर्ति फिर से शुरू करने पर सहमति दी, जबकि अमेरिका ने सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्यात पर लगी रोक हटाई।
चीन ने भारत को भी रेयर अर्थ धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था, जिससे ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योगों में कमी की स्थिति पैदा हुई।
इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने इस महीने की शुरुआत में भारत सहित 50 से अधिक देशों के साथ मिलकर एक “मेटालिक अलायंस” बनाने की बड़ी पहल शुरू की, ताकि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित की जा सके और चीन पर निर्भरता कम हो।
अमेरिकी सरकार ने घरेलू और सहयोगी देशों में खनन और प्रसंस्करण को वित्तपोषित करने के लिए 12 अरब अमेरिकी डॉलर की भंडारण रणनीति “प्रोजेक्ट वॉल्ट” भी शुरू की है।
हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के अनुसार, गानझोउ में ली ने पारंपरिक उद्योगों में चीन की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने और हरित ऊर्जा तथा नए पदार्थों जैसे क्षेत्रों में रेयर अर्थ के उपयोग का विस्तार करने पर जोर दिया।
उन्होंने चीन की कैबिनेट ‘स्टेट काउंसिल’ की बैठक की भी अध्यक्षता की, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से अन्य उद्योगों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई।
ली ने नीति-निर्माताओं से एआई विकास रुझानों की गहन समझ विकसित करने, एल्गोरिदम और बड़े भाषा मॉडल में नवाचार को आगे बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाले डेटा और कंप्यूटिंग क्षमता की आपूर्ति बढ़ाने तथा नई तकनीकी राहों की सक्रिय खोज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य एआई की पूरी श्रृंखला में प्रगति हासिल करना है।
उन्होंने कहा, “हमें डेटा, कंप्यूटिंग, बिजली, नेटवर्क संसाधनों और सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर के समन्वय से एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा।” PTI KJV RD RD RD
