अयोध्या मंदिर में ध्वजारोहण भारत की जीवंत सभ्यता की धरोहर का प्रतीक: आदित्यनाथ

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Nov. 25, 2025, Shri Ram Janmabhoomi temple illuminated with decorative lights after 'Dhwajarohan Utsav', in Ayodhya. (@myogiadityanath/X via PTI Photo)(PTI11_25_2025_000572B)

गोरखपुर (उप्र), 4 दिसंबर (PTI) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर के शिखर पर धार्मिक ध्वज का विधिवत् ध्वजारोहण प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है और यह देश की अखंड सभ्यतागत परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी का प्रतिनिधित्व करता है।

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के स्थापना सप्ताह समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि स्थल पर बने भव्य मंदिर और ‘धर्म ध्वज’ का आरोहण भारत की सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “यह हमारी सभ्यतागत यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो हर भारतीय में इस विरासत का उत्तराधिकारी होने का गर्व भरता है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर को राम मंदिर पर केसरिया ध्वज फहराकर इसके औपचारिक पूर्ण होने की घोषणा की थी। इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रनायकों में निहित है। सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास राष्ट्रीय एकता को कमजोर करता है।

उन्होंने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोबिंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई और उन असंख्य वीरों के योगदान को याद किया जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि त्योहार और परंपराएँ राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करती हैं और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की “पांच प्रतिज्ञाओं” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन संकल्पों ने देश को अपनी विरासत से पुनः जोड़ने, औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और सेना के प्रति सम्मान को दृढ़ करने में मदद की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत हाल के वर्षों में आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि यदि नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करें और एकता बनाए रखें, तो 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय पहचान को जाति, क्षेत्र और भाषा से ऊपर उठना चाहिए। यदि हम इन पाँच संकल्पों को आत्मसात कर लें, तो भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।”

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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