“अरावली राष्ट्रीय धरोहर है”: संरक्षण विवाद पर सचिन पायलट का हमला तेज

Bengaluru: AICC general secretary Sachin Pilot speaks as KPCC president and Karnataka Deputy Chief Minister DK Shivakumar looks on during a press conference at the KPCC office, in Bengaluru, Monday, Dec. 22, 2025. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI12_22_2025_000257B)

जयपुर, 26 दिसंबर (पीटीआई) — कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने शुक्रवार को दावा किया कि पहाड़ियों की नई परिभाषा के तहत अरावली पर्वतमाला का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा संरक्षण से बाहर हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अरावली को जानबूझकर खतरे में डालने के प्रयासों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जिनमें थार रेगिस्तान का दिल्ली तक फैलना भी शामिल है।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की ‘सेव अरावली–सेव द फ्यूचर’ मुहिम के तहत निकाले गए मार्च में शामिल होते हुए पायलट ने कहा कि अरावली वायु प्रदूषण से सुरक्षा कवच का काम करती है, भूजल संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखती है। उन्होंने कहा कि देशभर के लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि प्राचीन काल से करोड़ों लोगों की रक्षा करने वाली अरावली पर्वतमाला को आखिर कौन और क्यों खतरे में डाल रहा है। अगर अरावली नष्ट होती है तो रेगिस्तान दिल्ली तक फैल सकता है।

पायलट इस मार्च में अपने बेटे के साथ शामिल हुए। यह पहला अवसर था जब वे अपने बेटे को किसी राजनीतिक प्रदर्शन में साथ लेकर आए। पुलिस ने मार्च को गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहे पर रोक दिया और बताया कि अनुमति केवल वहीं तक की थी। आगे बढ़ने पर कार्रवाई की चेतावनी के बाद मार्च वहीं समाप्त हो गया।

वन सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए पायलट ने कहा कि केंद्र द्वारा तय की गई परिभाषा के तहत अरावली का 90 प्रतिशत हिस्सा असुरक्षित हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की एक समान परिभाषा स्वीकार की है और दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान व गुजरात में इसके दायरे में आने वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक नए खनन पट्टों पर रोक लगा दी है।

नई परिभाषा के अनुसार, ‘अरावली पहाड़ी’ वह भू-आकृति होगी जिसकी ऊंचाई स्थानीय धरातल से 100 मीटर या अधिक हो, जबकि ‘अरावली श्रेणी’ 500 मीटर के दायरे में स्थित दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह मानी जाएगी। पायलट ने कहा कि एफएसआई के आंकड़ों के मुताबिक अरावली क्षेत्र में 1.18 लाख पहाड़ियां 100 मीटर से कम ऊंचाई की हैं, जबकि केवल 1,048 पहाड़ियां 100 मीटर से अधिक ऊंची हैं। इसका मतलब है कि लगभग 90 प्रतिशत अरावली क्षेत्र परिभाषा से बाहर होकर संरक्षण से वंचित हो जाएगा।

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने सरकार के इस दावे को भ्रामक बताया कि बिना अनुमति कोई गतिविधि नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिबंध पिछले दो दशकों से मौजूद हैं, इसके बावजूद सरकार की नाक के नीचे अवैध खनन होता रहा है और आज भी जारी है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार इसे रोकने के लिए आखिर क्या कदम उठा रही है।

पायलट ने दोहराया कि अरावली राजस्थान में मरुस्थलीकरण को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है और इसके नष्ट होने से वायु प्रदूषण, भूजल, पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा। सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि या तो सरकार बेबस है, दबाव में है, या फिर उसमें इच्छाशक्ति की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार स्पष्टीकरण जारी करने के बावजूद सरकार ने अब तक सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं किया है ताकि परिभाषा के मुद्दे को दोबारा प्रस्तुत कर सुलझाया जा सके।

व्यापक राजनीतिक साजिश का आरोप लगाते हुए पायलट ने कहा कि केंद्र और गुजरात, राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली की भाजपा सरकारें ऐसे तरीके से काम कर रही हैं जिससे अरावली पर्वतमाला खतरे में पड़ रही है। उन्होंने कहा कि ये सभी सरकारें मानो इस होड़ में लगी हैं कि अरावली को कैसे नष्ट किया जाए।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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