अरुणाचल के लिए हिंदी एकता की भाषा, इसे सीखने में कोई समस्या नहीं: सीएम पेमा खांडू

नई दिल्ली, 10 जुलाई (पीटीआई) — अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि हिंदी उनके राज्य में एकता की भाषा है, जहां हर जनजाति अपनी अलग बोली और भाषा बोलती है। खांडू ने पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा की शुरुआत से ही हिंदी स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल रही है और इसे सीखने में किसी को कोई समस्या नहीं है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में इतनी विविधता है कि 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से अधिक उप-जनजातियां अपनी-अपनी भाषाएं और बोलियां बोलती हैं।

उन्होंने कहा, “अगर मैं अपनी बोली या भाषा में बोलूं तो दूसरी जनजाति के लोग समझ नहीं पाएंगे। इसलिए सभी हिंदी बोलते हैं। निश्चित रूप से व्याकरण संबंधी गलतियां होती हैं… लेकिन आप किसी भी गांव में चले जाएं, सभी ग्रामीण हिंदी समझते और बोलते हैं। हम चुनाव प्रचार में और विधानसभा में भी हिंदी बोलते हैं।

तो निश्चित रूप से, हिंदी एक बाइंडिंग (एकता की) भाषा है। इसे सीखने में कोई समस्या नहीं है। इसे सीखा जाना चाहिए।”

बीजेपी नेता खांडू ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब महाराष्ट्र और दक्षिण के कुछ राज्यों में हिंदी को लेकर विवाद चल रहा है।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक रणनीतिक स्थान है, जहां सुरक्षा बलों के जवान अलग-अलग राज्यों से आते हैं और अधिकांश हिंदी में ही संवाद करते हैं।

“यहां बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन भी है। तो कई माध्यम हैं जिनसे हमने हिंदी जल्दी सीख ली,” उन्होंने कहा।

जब उनसे कुछ राज्यों में हिंदी का विरोध किए जाने के बारे में पूछा गया, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हर किसी की अपनी मातृभाषा होती है, हर राज्य की अपनी भाषा होती है और हर जनजाति की भी अपनी भाषा होती है।

“उसे महत्व मिलना चाहिए… मैं भी अपने राज्य में मानता हूं कि जनजातियों की अलग-अलग भाषाओं को संरक्षित किया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा।

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने स्वदेशी भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक स्वदेशी मामलों का विभाग शुरू किया है।

खांडू ने कहा कि वे राज्य के बाहर पढ़ाई करने जाने वाले युवाओं से कहते हैं कि जब वे घर लौटें तो अपनी भाषा में ही बोलें।

“क्योंकि वही उनकी पहचान है। हमारे देश में इतनी सारी जातियां, धार्मिक समूह, समुदाय और पृष्ठभूमियां हैं। इसलिए अपनी भाषा को अपने स्थान पर संरक्षित करना बहुत जरूरी है,” उन्होंने कहा।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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