आईआरसीटीसी मामले में आरोप तय किए जाने के खिलाफ राबड़ी देवी की याचिका पर हाईकोर्ट ने सीबीआई से जवाब मांगा

Patna: RJD MLC Rabri Devi and party legislators stage a walkout from the Bihar Assembly during the ongoing Winter session, in Patna, Thursday, Dec. 4, 2025. (PTI Photo)(PTI12_04_2025_000223B)

नई दिल्ली, 16 जनवरी (पीटीआई) — दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आईआरसीटीसी कथित घोटाला मामले में आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से अपना पक्ष रखने को कहा है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने राबड़ी देवी की याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की है। इसी दिन उनके पति लालू प्रसाद यादव और बेटे तेजस्वी यादव की ओर से दायर की गईं समान याचिकाएं भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।

इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव और 11 अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए थे।

राबड़ी देवी ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी ठोस सामग्री के उनके खिलाफ साजिश में भूमिका होने का अनुमान लगा लिया। याचिका में कहा गया है कि यह रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य है कि न तो लालू प्रसाद और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य, जिनमें याचिकाकर्ता भी शामिल हैं, का रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों के टेंडर प्रक्रिया से कोई लेना-देना था। अभियोजन पक्ष ने भी यह स्वीकार किया है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान लालू प्रसाद ने न तो मौखिक और न ही लिखित रूप से कोई निर्देश दिया था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि विशेष अदालत ने केवल इस आधार पर आरोप तय कर दिए कि लालू प्रसाद उस समय रेल मंत्री थे और ऊंचे पद पर थे, इसलिए यह मान लिया गया कि उनका आईआरसीटीसी अधिकारियों पर प्रभाव हो सकता था और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई होगी, जबकि इस बात का फैसला ट्रायल के बाद ही हो सकता है।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच एक आपराधिक साजिश रची गई, जिसके तहत भारतीय रेल के पुरी और रांची स्थित बीएनआर होटलों को पहले आईआरसीटीसी को सौंपा गया और बाद में पटना स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को संचालन, रखरखाव और प्रबंधन के लिए लीज पर दे दिया गया।

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, उस समय के रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सुजाता होटल्स की मालकिन सरला गुप्ता, जो उनके करीबी सहयोगी और राजद सांसद प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी हैं, तथा आईआरसीटीसी अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची ताकि खुद और अन्य लोगों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि बीएनआर होटलों को सुजाता होटल्स को देने के लिए आईआरसीटीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पी. के. गोयल द्वारा टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर प्रभावित और हेरफेर किया गया।

लालू यादव के अलावा अदालत ने प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(d)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए हैं, जो लोक सेवक द्वारा पद के दुरुपयोग से संबंधित हैं।

अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, एम/एस लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत भी आरोप तय करने का निर्देश दिया था।

इसके अलावा सभी 14 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत एक संयुक्त आरोप तय करने के निर्देश दिए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम सजा 10 वर्ष और धोखाधड़ी के मामले में अधिकतम सजा सात वर्ष है।

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