
शिमला, 1 अप्रैल (भाषा)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने बुधवार को कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अलग नीति नहीं बनाई जाएगी, जो लंबे समय से नौकरी की सुरक्षा और स्थायी अनुबंध की मांग कर रहे हैं।
भाजपा विधायकों प्रकाश राणा और जनक राज द्वारा उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में, सुखू ने कहा कि आउटसोर्स आधार पर नियुक्त कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की वर्तमान में ऐसे कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा या दीर्घकालिक अनुबंध के संबंध में एक अलग नीति तैयार करने की कोई योजना नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में सरकारी विभागों में आउटसोर्स आधार पर सेवाएं प्रदान करने वाले लगभग 13,000 कर्मचारी हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार नियमित पदों को आउटसोर्स के आधार पर नहीं भरती है, बल्कि हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियम, 2009 के तहत जारी निविदा के माध्यम से केवल कुछ विशिष्ट सेवाओं को भरती है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश 1 जुलाई, 2017 और 18 जनवरी, 2021 को जारी किए गए थे।
सुखू ने कहा कि दिशानिर्देशों में कहा गया है कि सेवा प्रदाता एजेंसियों को हर महीने की 7 तारीख तक कर्मचारियों का पारिश्रमिक वितरित करना होगा।
भाजपा विधायकों ने पिछले दो वर्षों (31 जनवरी, 2026 तक) में दर्ज किए गए ऐसे कार्यकर्ताओं के वेतन में देरी के मामलों की संख्या और की गई कार्रवाई के बारे में भी पूछा।
सुखू ने जवाब दिया कि इस अवधि के दौरान ऐसा कोई मामला सरकार के संज्ञान में नहीं लाया गया था। पीटीआई बीपीएल वीएन वीएन
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