आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) की एक अदालत ने बुधवार को हत्या के एक मामले में एक ही परिवार के पांच सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 61,500 रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
जिला और सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडे ने मुकदमा पूरा होने के बाद फैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला शिकायतकर्ता राजेश कुमार और आरोपी राजकुमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद से जुड़ा है, दोनों जहानागंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत बड़ौदा खुर्द गांव के निवासी हैं।
3 जनवरी, 2023 को राजकुमार और उनके तीन बेटे-दीपक उर्फ अमित, मनीष उर्फ डंपी और सतीश उर्फ पंपी-अपनी पत्नी आशा और एक रिश्तेदार अलका के साथ कथित तौर पर सुबह में डंडों और कुल्हाड़ी से लैस होकर राजेश के घर में घुस गए।
हमलावरों ने कथित तौर पर राजेश, उसकी पत्नी कौशल्या, एक रिश्तेदार, राकेश और राकेश की पत्नी बबीता पर हमला किया।
हमले में लगी चोटों के कारण कौशल्या की मौके पर ही मौत हो गई।
जांच के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों से पूछताछ की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने राजकुमार, उनके तीन बेटों और उनकी पत्नी आशा को दोषी ठहराया, उन्हें आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 61,500 रुपये का जुर्माना लगाया।
अल्का को अपर्याप्त सबूतों के कारण बरी कर दिया गया। पीटीआई कोर एबीएन पीआरके पीआरके
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