
नई दिल्ली, 28 नवम्बर (PTI) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत शांति और संवाद में विश्वास रखता है, लेकिन जब देश की संप्रभुता और सुरक्षा का सवाल होता है, तो वह कोई “समझौता” नहीं करता।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत “संतुलन और जिम्मेदारी की आवाज़” बन गया है और इंडो-पैसिफिक तथा ग्लोबल साउथ के देश नई दिल्ली को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं।
उन्होंने चाणक्य डिफेंस डायलॉग में कहा,
“भारत की आर्थिक वृद्धि, तकनीकी क्षमताएं और सैद्धांतिक विदेश नीति ने इसे बदलते वैश्विक वातावरण में संतुलन और जिम्मेदारी की आवाज़ बना दिया है, और इंडो-पैसिफिक तथा ग्लोबल साउथ के देश हमें एक विश्वसनीय साझेदार मानते हैं।”
सिंह ने कहा कि भारत सभ्यतागत मूल्यों में निहित आत्मविश्वास, रणनीतिक स्वायत्तता और जिम्मेदारी की भावना के साथ वैश्विक चर्चाओं को आकार दे रहा है।
उन्होंने कहा,
“भारत शांति और संवाद में विश्वास करता है, लेकिन जब जनता की संप्रभुता और सुरक्षा की बात आती है, तो हम समझौता नहीं करते।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रों की संप्रभुता के सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था के लिए भारत के निरंतर रुख और दूरगामी सुधारों ने वैश्विक विश्वास अर्जित किया है।
रक्षा मंत्री ने बताया,
“हम सुरक्षा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए सीमा और समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। हम अपने बलों का आधुनिकीकरण नए प्लेटफॉर्म, तकनीकों और ढांचों के माध्यम से कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“हम खरीद प्रक्रियाओं में तेज़ी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधार कर रहे हैं। ‘आत्मनिर्भरता’ के माध्यम से हम एक रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बना रहे हैं जो नवाचार को बढ़ावा देता है, उद्योगों का समर्थन करता है और बाहरी निर्भरता को कम करता है।”
सिंह ने कहा कि भारत स्टार्ट-अप्स, “डीप-टेक” क्षमताओं और अनुसंधान एवं विकास में भी निवेश कर रहा है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्रों को परिभाषित करेगा।
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