
नई दिल्ली, 28 जनवरी (पीटीआई): दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के बारामूला से जेल में बंद लोकसभा सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आतंक फंडिंग मामले में उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ राशिद द्वारा दायर अपील विचारणीय (मेंटेनेबल) नहीं है।
पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय की एक समन्वय पीठ पहले ही एक अन्य मामले में यह स्पष्ट कर चुकी है कि आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल नहीं की जा सकती, क्योंकि यह अंतिम आदेश नहीं होता।
पीठ ने कहा, “वर्तमान अपील भी विचारणीय नहीं है और इसे विचारणीय न होने के आधार पर खारिज किया जाता है।”
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि राशिद की अपील 1100 दिनों की देरी से दायर की गई है, जिसे माफ नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि अदालत ने कहा कि चूंकि अपील मेरिट के आधार पर ही विचारणीय नहीं है, इसलिए वह देरी के पहलू पर विचार नहीं कर रही है।
इंजीनियर राशिद 2017 के आतंक फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से वर्ष 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
बारामूला से सांसद राशिद, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला को हराया था, पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को फंडिंग करने के आरोप हैं।
एनआईए की एफआईआर के अनुसार, कारोबारी और सह-आरोपी जहीर वटाली से पूछताछ के दौरान राशिद का नाम सामने आया था।
अक्टूबर 2019 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद, मार्च 2022 में एक विशेष एनआईए अदालत ने राशिद और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 124ए (राजद्रोह) तथा यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्यों और आतंक फंडिंग से संबंधित धाराओं में आरोप तय किए थे।
इस बीच, दिल्ली की एक अदालत ने राशिद को बुधवार से शुरू हुए संसद के बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति कस्टडी पैरोल पर दी है, जिसके तहत कैदी को सशस्त्र पुलिस कर्मियों की निगरानी में उसके गंतव्य तक ले जाया जाता है।
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