
मदुरै (तमिलनाडु), 12 फरवरी (पीटीआई) पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने गुरुवार को कहा कि आज के दौर में, जब खिलाड़ी कंप्यूटर से मिलने वाले भारी-भरकम डेटा से घिरे हुए हैं, आधुनिक शतरंज में असली अंतर गहरी समझ ही पैदा करती है।
तीन दिवसीय शतरंज कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में आनंद ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि जितना अधिक जानने के लिए उपलब्ध होता है, उतना ही कम आप वास्तव में जान पाते हैं। यदि हर दिन आपको 20-30 नए निष्कर्षों से गुजरना पड़े, तो आप उन्हें कैसे समझेंगे? मेरा मानना है कि आज शतरंज खिलाड़ियों के बीच केवल गहरी समझ ही फर्क पैदा करती है।”
कई वर्ष पहले कंप्यूटर के साथ खुद को ढालने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए ग्रैंडमास्टर ने कहा कि नए विचारों के प्रति खुला रहना जरूरी है, लेकिन बारीकियों को समझना ही खिलाड़ी को नए स्तर पर पहुंचाता है।
आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि शतरंज में महारत रटने से नहीं, बल्कि पैटर्न पहचानने की क्षमता से आती है।
करीब 6,000 से 7,000 प्रतिस्पर्धी मुकाबले खेलने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मस्तिष्क अनजाने में दूसरों द्वारा खेले गए खेलों के पैटर्न को जोड़ता रहता है।
उन्होंने कहा, “हमारा मस्तिष्क जितने पैटर्न जोड़ता है, उन्हें हम उतना समझा नहीं पाते।” उन्होंने जोड़ा कि कई बार किसी खेल को देखने के हफ्तों बाद नए विचार अचानक दिमाग में आते हैं, और हमें एहसास भी नहीं होता कि हम कहीं से कुछ ‘कॉपी’ कर रहे हैं।
शतरंज की तुलना भाषा से करते हुए आनंद ने कहा कि केवल सिद्धांत पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा, “आपको वह भाव विकसित करना होता है। जैसे कोई भाषा आप केवल शब्दकोश से नहीं सीख सकते, उसे बोलकर सीखते हैं।”
उन्होंने सैद्धांतिक विचारों को खेल शुरू होने से पहले की “सामग्री” बताया और कहा कि असली “पकवान” तो खेल के दौरान तैयार होता है।
तमिलनाडु में चेन्नई के अलावा मदुरै, सलेम और कोयंबटूर जैसे शहरों में भी शतरंज को लोकप्रिय बनाने की पहल का समर्थन करते हुए आनंद ने इसकी सराहना की।
इस कार्यक्रम में आनंद की पुस्तक ‘लाइटनिंग किड’ का विमोचन भी किया गया, जिसे वेलम्मल एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से प्रकाशित किया गया है। यह मास्टरक्लास 12 से 14 फरवरी तक वेलम्मल एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित की जा रही है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मास्टर प्रग्नानंदा आर (रैंक 4), वैशाली आर (रैंक 9), डी. गुकेश (रैंक 9), वर्षिनी एस और मुरली कार्तिकेयन (दोनों रैंक 64) वेलम्मल के पूर्व छात्र रहे हैं।
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