
मुंबई, 6 फरवरी (पीटीआई) भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत और उसके बाद की तीन महीनों की अवधि के लिए 7 प्रतिशत कर दिया। यह संशोधन व्यापार समझौतों, जीएसटी के युक्तिकरण और मजबूत कृषि उत्पादन को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
दिसंबर में आरबीआई ने 2026-27 की जून तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत और जुलाई-सितंबर अवधि के लिए 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमान अप्रैल में होने वाली अगली मौद्रिक नीति घोषणा में जारी किए जाएंगे, जिसमें नए जीडीपी और सीपीआई श्रृंखला (अद्यतन आधार वर्ष 2024=100) को शामिल किया जाएगा।
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर सुधार की राह पर बनी हुई है। वास्तविक जीडीपी के 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने वृद्धि को सहारा दिया है।”
उन्होंने कहा कि आगे चलकर 2026-27 में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
कृषि गतिविधियों को स्वस्थ जलाशय स्तर, रबी की मजबूत बुवाई और फसलों की स्थिति में सुधार से समर्थन मिलेगा। इसके अलावा, कॉरपोरेट क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और असंगठित क्षेत्र में बनी गति से विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र की वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जबकि सेवा क्षेत्र घरेलू मांग के मजबूत होने से लचीला बना रहेगा।
मांग पक्ष पर, 2026-27 में निजी उपभोग की गति बने रहने की उम्मीद है, जबकि ग्रामीण मांग स्थिर रहने की संभावना है।
गवर्नर ने कहा कि जीएसटी के युक्तिकरण और मौद्रिक ढील के निरंतर समर्थन से शहरी उपभोग में सुधार और मजबूती आने की संभावना है।
मल्होत्रा ने कहा, “उच्च क्षमता उपयोग, तेज़ी से बढ़ता बैंक ऋण, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और बुनियादी ढांचे पर सरकार का निरंतर जोर निवेश गतिविधियों को प्रोत्साहन देगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, अन्य कई व्यापार समझौतों के साथ मिलकर, मध्यम अवधि में निर्यात को समर्थन देंगे।
इसके अलावा, केंद्रीय बजट में घोषित कई उपाय भी आर्थिक वृद्धि के लिए अनुकूल साबित होंगे।
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