नई दिल्ली, 5 जनवरी (पीटीआई)
दिल्ली पुलिस शिक्षा निदेशालय (DoE) के आवारा कुत्तों से संबंधित एक सर्कुलर को लेकर कथित तौर पर भ्रामक सूचना फैलाने वाले पोस्ट हटाने के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पत्र लिख सकती है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी के अनुसार, पुलिस ऐसे कंटेंट अपलोड करने वाले अकाउंट्स का विवरण भी मांगेगी।
यह कदम शिक्षा निदेशालय की शिकायत पर एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद उठाया गया है, जिसमें कुछ सोशल मीडिया यूजर्स पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दिल्ली के स्कूल शिक्षकों से आवारा कुत्तों की गिनती कराए जाने से जुड़ी “झूठी और भ्रामक” बातें फैलाईं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजे जाने वाले पत्र में शिकायत में चिन्हित कंटेंट को तुरंत हटाने का अनुरोध किया जाएगा, साथ ही जांच के तहत संबंधित अकाउंट्स की सब्सक्राइबर डिटेल्स, आईपी लॉग्स और अन्य प्रासंगिक जानकारियां भी मांगी जाएंगी।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(1) (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम सहित झूठी सूचना बनाना या प्रसारित करना) और धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस सरकार द्वारा साझा किए गए सोशल मीडिया हैंडल्स की सूची की जांच करेगी और कथित भ्रामक सूचना फैलाने में प्रत्येक अकाउंट की भूमिका का आकलन करेगी।
दिल्ली सरकार का आरोप है कि स्कूलों में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों के समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी विभागीय सर्कुलर को लेकर सोशल मीडिया पर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही थी, जिसके बाद DoE ने यह शिकायत दर्ज कराई।
सिविल लाइंस थाने में दी गई शिकायत में DoE ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर “झूठी, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण जानकारी” फैलायी जा रही है, जिससे शिक्षा विभाग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और सरकारी संस्थानों पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
शिकायत में प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) के मामलों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें कथित तौर पर ऐसे वीडियो शामिल हैं जिनमें कुछ लोग खुद को शिक्षक बताकर आवारा कुत्तों की गिनती करते दिख रहे हैं। विभाग ने पुलिस से ऐसे कंटेंट के स्रोत की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
मामले की आगे जांच जारी है।

