
ढाका, 7 जनवरी (पीटीआई) — मारे गए छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की पार्टी इंक़िलाब मंचो ने उनकी हत्या के मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट को खारिज करते हुए राज्य मशीनरी की संलिप्तता का आरोप लगाया है।
बांग्ला दैनिक प्रथम आलो की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक, इंक़िलाब मंचो ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ तो जिन लोगों ने “खून बहाया है”, वे “खून लेने” के लिए भी मजबूर हो सकते हैं।
ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) की डिटेक्टिव ब्रांच ने मंगलवार को हत्या के सिलसिले में 17 लोगों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए, जिनमें मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद भी शामिल है। पुलिस ने कहा कि हादी की हत्या “राजनीतिक प्रतिशोध” के तहत अवामी लीग-नामित वार्ड पार्षद तैजुल इस्लाम चौधरी बप्पी के इशारे पर की गई।
इंक़िलाब मंचो के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने कहा कि “कोई पागल भी यह नहीं मानेगा” कि हादी की हत्या केवल एक वार्ड पार्षद के निर्देश पर हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पुलिस की चार्जशीट को स्वीकार नहीं करती।
जाबेर ने दावा किया कि इस हत्या में एक पूरा “आपराधिक सिंडिकेट” और “राज्य मशीनरी” शामिल थी।
उन्होंने पार्टी के ‘मार्च फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के समापन के बाद कहा, “जब तक सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता, हमारा संघर्ष नहीं रुकेगा। जिनके नाम चार्जशीट में नहीं हैं, ऐसी किसी भी चार्जशीट को हम स्वीकार नहीं करेंगे।”
उन्होंने कहा कि इंक़िलाब मंचो ने न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण कार्यक्रम किए, लेकिन चार्जशीट से यह साफ है कि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की और “लोगों को मूर्ख समझा।”
जाबेर ने चेतावनी दी कि यदि हादी की हत्या में न्याय नहीं मिला और जिसे उन्होंने “भारतीय वर्चस्व” कहा, वह समाप्त नहीं हुआ, तो जनता परिणाम तय करेगी।
“इन लोगों ने खून बहाया है; ज़रूरत पड़ी तो वे खून लेंगे भी,” उन्होंने कहा।
इंक़िलाब मंचो के प्रवक्ता हादी (32) जुलाई–अगस्त 2024 के जनआंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए थे, जिसने शेख हसीना सरकार के पतन का रास्ता साफ किया। 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उनके सिर में गोली मारी गई थी। आगामी 12 फरवरी के चुनाव के लिए वह संसदीय उम्मीदवार भी थे। उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।
मंगलवार को ढाका में एक प्रेस ब्रीफिंग में डीएमपी डिटेक्टिव ब्रांच के अतिरिक्त आयुक्त एमडी शफीकुल इस्लाम ने कहा कि कथित शूटर मसूद सीधे तौर पर अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग से जुड़ा था। उन्होंने बताया कि हत्या के बाद मसूद और एक अन्य प्रमुख आरोपी आलमगीर शेख को भागने में बप्पी ने मदद की। बप्पी पल्लबी थाना छात्र लीग का अध्यक्ष भी था।
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने पिछले साल अवामी लीग और उसकी छात्र शाखा दोनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
हादी की हत्या से बांग्लादेश में नई राजनीतिक उथल-पुथल पैदा हुई और भारत के साथ संबंधों में भी तनाव आया, क्योंकि कुछ समूहों ने इस अपराध में भारत की भूमिका का आरोप लगाया। नई दिल्ली ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज करते हुए इन्हें “झूठा नैरेटिव” बताया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले महीने नई दिल्ली में कहा था, “बांग्लादेश में पेश किए जा रहे झूठे नैरेटिव को हमने खारिज किया है। वहां की कानून-व्यवस्था और घटनाक्रम की जिम्मेदारी बांग्लादेश सरकार की है। तथ्यों को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश पूरी तरह गलत है और हम इसे अस्वीकार करते हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के लोगों के साथ संबंध मजबूत करने और देश में शांति व स्थिरता का समर्थक है। भारत ने दोनों देशों के संबंधों में आई गिरावट के बीच हादी की हत्या की गहन जांच की भी मांग की है।
28 दिसंबर को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने दावा किया था कि संदिग्ध मसूद और शेख “स्थानीय सहयोगियों की मदद से हलुआघाट सीमा के रास्ते भारतीय राज्य मेघालय में दाखिल हुए।” हालांकि, मेघालय की सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को “बेबुनियाद और भ्रामक” बताते हुए खारिज कर दिया।
मेघालय में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिरीक्षक ओ. पी. ओपाध्याय ने कहा था, “हलुआघाट सेक्टर से मेघालय में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का कोई सबूत नहीं है। बीएसएफ को न तो ऐसी कोई घटना मिली है और न ही कोई रिपोर्ट प्राप्त हुई है।”
मेघालय पुलिस ने भी कहा कि आरोपियों की गारो हिल्स क्षेत्र में मौजूदगी की पुष्टि करने वाला “कोई इनपुट या खुफिया जानकारी” नहीं है। गारो हिल्स क्षेत्र मेघालय के पश्चिमी हिस्से में आता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है और जिसकी निगरानी बीएसएफ करती है।
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