नई दिल्ली, 2 जुलाई (पीटीआई) — इंडिया गठबंधन के कई दलों के नेताओं ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग से मुलाकात की और अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं।
कांग्रेस, राजद, सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, एनसीपी-एसपी और समाजवादी पार्टी सहित 11 दलों के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मिलकर राज्य में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हो रही इस विशेष जांच पर आपत्ति जताई।
इंडिया गठबंधन के दलों ने बिहार में शुरू हो चुकी इस प्रक्रिया का विरोध किया है, जो अगले साल चुनाव वाले असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी लागू होगी।
बैठक के बाद कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग परिसर में प्रवेश के लिए केवल पार्टी अध्यक्षों को ही अनुमति देने के नए निर्देश का भी विरोध किया।
उन्होंने कहा, “पहली बार हमें चुनाव आयोग में प्रवेश के लिए नियम दिए गए। पहली बार कहा गया कि केवल पार्टी प्रमुख ही जा सकते हैं। ऐसी पाबंदी से राजनीतिक दलों और आयोग के बीच जरूरी संवाद संभव नहीं हो पाता।”
सिंघवी ने बताया कि उन्होंने SIR प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे उठाए।
“हमने पूछा कि पिछली पुनरीक्षण के बाद बिहार में चार-पांच चुनाव हो चुके हैं। 2003 में SIR लोकसभा चुनाव से एक साल पहले हुआ था, वह भी बिहार विधानसभा चुनाव से 24 महीने पहले,” उन्होंने कहा।
राजद नेता मनोज झा ने सवाल किया कि क्या यह प्रक्रिया लोगों को मताधिकार से वंचित करने के लिए है।
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के नेता दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार के 20% लोग काम के लिए बाहर जाते हैं, ऐसे में उनके पास जरूरी प्रमाणपत्र नहीं होंगे और वे मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
चुनाव आयोग ने बिहार में अपात्र नाम हटाने और सभी पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करने के लिए SIR के निर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि गहन पुनरीक्षण के दौरान अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल होने से रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं।
विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को गरीब, प्रवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश बताया है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के अनुसार है।

