इंदौर जल प्रदूषण मामला: विजयवर्गीय ने चूक स्वीकार की, बोले—दोषी अधिकारी किसी भी हाल में नहीं बचेंगे

Kailash Vijayvargiya

इंदौर, 31 दिसंबर (PTI): मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को इंदौर में दूषित पेयजल के कारण फैली बीमारी और अब तक सात लोगों की मौत के मामले में अधिकारियों की चूक स्वीकार की। उन्होंने साफ कहा कि इस लापरवाही के लिए जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें उनके पद की परवाह किए बिना बख्शा नहीं जाएगा।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने के बाद अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने की है। बीते एक सप्ताह में उल्टी-दस्त की चपेट में 1,100 से अधिक लोग आए हैं, जिनमें से 111 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा, अधिकारियों ने बताया।

भागीरथपुरा इलाका नगरीय विकास एवं आवास मंत्री विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में आता है। इस मामले पर पूछे जाने पर विजयवर्गीय ने कहा, “मुझे लगता है कि कहीं न कहीं गलती हुई है, लेकिन इस समय इस पर बहस करने के बजाय प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सभी मरीज स्वस्थ हों और सकारात्मक माहौल बने।” उन्होंने दोहराया कि दूषित पेयजल मामले के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी को, चाहे वह कितना ही ऊंचे पद पर क्यों न हो, नहीं छोड़ा जाएगा।

मौतों की संख्या को लेकर उन्होंने फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि कुछ लोगों की मौत प्राकृतिक कारणों से भी हुई हो सकती है, जबकि कुछ मौतें इस घटना से जुड़ी हैं। “डॉक्टरों और प्रशासन की जांच के बाद ही सही आंकड़े सामने रखे जाएंगे,” उन्होंने कहा।

विजयवर्गीय ने बताया कि भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या में कमी आई है, लेकिन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती अभी भी जारी है। इलाके में चार एंबुलेंस और मेडिकल कर्मियों की अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी महाराजा यशवंतराव अस्पताल और निजी श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं। साथ ही, क्षेत्र के निजी अस्पतालों को भी सूचित कर दिया गया है कि सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि भागीरथपुरा में मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन में एक स्थान पर लीकेज पाया गया, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ था। इसी वजह से पानी के दूषित होने की आशंका है।

एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और एक सहायक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक प्रभारी उप-यंत्री की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा, इस पूरे मामले की जांच के लिए एक आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

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