इंदौर, 21 जनवरी (पीटीआई) — मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल संकट से जुड़े मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश प्रशासन को दिया है। इनमें पेयजल पाइपलाइन बिछाने से संबंधित टेंडर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट शामिल हैं।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ मंगलवार को दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर दायर कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “यह निर्देश दिया जाता है कि कलेक्टर, इंदौर तथा आयुक्त, नगर निगम यह सुनिश्चित करें कि याचिका के विषय से संबंधित सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड, जिनमें भागीरथपुरा में पेयजल लाइन बिछाने के टेंडर से जुड़ा रिकॉर्ड और सैंपल रिपोर्ट आदि शामिल हैं, सुरक्षित अभिरक्षा में रखे जाएं।”
यह आदेश याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा यह आशंका जताए जाने के बाद दिया गया कि मूल दस्तावेजों से छेड़छाड़ की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 6 जनवरी के अपने अंतरिम आदेशों का पालन जारी रखने और एक और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। इससे पहले अदालत ने प्रशासन को भागीरथपुरा में डायरिया से पीड़ित लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, लोगों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने, दूषित जल स्रोतों के उपयोग को रोकने, जल परीक्षण और कीटाणुशोधन व्यवस्था को मजबूत करने, जल आपूर्ति ढांचे को उन्नत करने तथा दीर्घकालिक जल सुरक्षा योजना लागू करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट 27 जनवरी को इन जनहित याचिकाओं पर अगली सुनवाई करेगा और उस दिन मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी ऑनलाइन उपस्थित होने का निर्देश दिया है। जैन मंगलवार की सुनवाई और इससे पहले की दो सुनवाइयों में वीडियो लिंक के माध्यम से शामिल हुए थे।
सरकारी वकीलों ने अदालत को बताया कि पेयजल दूषण के कारणों की जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि यह समिति केवल दिखावा है और इसका उद्देश्य इस स्थिति के लिए जिम्मेदार उच्च अधिकारियों को बचाना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम हाईकोर्ट के अंतरिम निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं। राज्य सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से प्रस्तावित निगरानी समिति के लिए स्वतंत्र सदस्यों के नाम सुझाने को कहा। यह समिति जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित की जानी है ताकि अंतरिम आदेशों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके। वकीलों ने इसके लिए समय मांगा।
जहां स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिसंबर से दूषित पानी के कारण उल्टी और दस्त से मरने वालों की संख्या 25 है, वहीं राज्य सरकार की 15 जनवरी को हाईकोर्ट में दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार अब तक सात लोगों की मौत हुई है। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा में 15 मौतें इस मुद्दे से जुड़ी हो सकती हैं।
अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा के 51 ट्यूबवेलों में दूषित पानी पाया गया है और जांच रिपोर्ट में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है। अधिकारियों ने बताया कि यह दूषण शौचालय के सीवेज के पाइपलाइन से पेयजल में मिल जाने के कारण हुआ।
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