इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश का पालन नहीं करने पर अधिकारियों को तलब किया

Allahabad HC summons officials over non-compliance of its order

लखनऊ, 6 जनवरी (एजेंसी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उचित प्रतिक्रिया न मिलने और अपने पिछले आदेश का पालन न करने पर गंभीर अप्रसन्नता व्यक्त की है और प्रधान सचिव (वन), मुख्य वन संरक्षक और लखनऊ के संभागीय वन अधिकारी को 13 जनवरी को तलब किया है।

उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए के चौधरी की पीठ ने सोमवार को वकील जयंत सिंह तोमर द्वारा 2013 में दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में उत्तर प्रदेश के आम क्षेत्र और आम के पेड़ों की अवैध कटाई से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं।

अदालत ने जनवरी 2014 में एक आदेश पारित कर राज्य सरकार से कुछ जानकारी मांगी थी।

चूंकि जानकारी सामने नहीं आ रही थी, इसलिए अदालत ने 12 नवंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सरकार पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिर पाया कि उसके आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार के वकील अदालत को यह नहीं बता सके कि क्या पिछले आदेश द्वारा लगाई गई लागत का भुगतान किया गया था।

अदालत में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने कहा कि पेड़ों की जियो-टैगिंग और पेड़ों की कटाई के मुद्दे जनवरी 2014 के आदेश में उठाए गए थे। सरकारी वकील ने जवाब दिया कि जियो-टैगिंग 2018 से हो रही है।

अदालत ने इस संबंध में लिखित निर्देश देने में विफल रहने पर बागवानी विभाग के प्रधान सचिव को भी तलब किया है। पीटीआई कोर एनएवी आरसी

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