इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदर आतंक से निपटने के उपायों की जानकारी मांगी

प्रयागराज, 26 फरवरी (PTI) – इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य में बढ़ते बंदर आतंक, विशेषकर गाजियाबाद और मथुरा जैसे जिलों में, से निपटने के लिए तैयार मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका (PIL) पर यह आदेश पारित किया।

सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने प्रस्तुत किया कि रीसस मकाक (रिसस बंदर) की जनसंख्या स्थिति का आकलन करने, संघर्ष के हॉटस्पॉट चिन्हित करने और मानव-बंदर संघर्ष को कम करने के लिए उपयुक्त प्रबंधन रणनीतियां सुझाने हेतु एक व्यवस्थित फील्ड सर्वे आवश्यक है।

17 फरवरी को पारित अपने आदेश में अदालत ने कहा, “प्रस्तावित अध्ययन के मद्देनजर, जो किया जाना है, हमें उचित प्रतीत होता है कि गाजियाबाद और मथुरा जिलों के संबंध में मौजूदा SOP के तहत प्राधिकरण द्वारा तैयार कार्ययोजना की जानकारी अगली निर्धारित तिथि से पहले हलफनामे के माध्यम से उच्च न्यायालय को दी जाए।”

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की है।

यह जनहित याचिका गाजियाबाद निवासी विनीत शर्मा और एक अन्य द्वारा दायर की गई है, जिसमें बंदरों की बढ़ती आबादी, मानव-बंदर संघर्ष में वृद्धि, जानवरों में भूख और कुपोषण तथा कथित अमानवीय परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई गई है।

13 जनवरी को उच्च न्यायालय ने राज्य प्राधिकारियों को बंदर आतंक से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि कार्ययोजना बनाते समय भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक योजना पर भी पर्यावरण विभाग विचार कर सकता है।

ताजा सुनवाई में अपर महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जनसंख्या आंकड़ों और संघर्ष के पैटर्न के आधार पर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा।

उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्थित अध्ययन के माध्यम से आधारभूत आंकड़े तैयार नहीं हो जाते, तब तक मौजूदा SOP ‘बंदरों को पकड़ने, परिवहन और छोड़ने संबंधी निर्देश’ और प्रस्तावित प्रारंभिक कार्ययोजना को लागू किया जा सकता है।

गोयल ने आगे बताया कि SOP के तहत एक उच्चस्तरीय समिति पहले ही गठित की जा चुकी है और नए कार्ययोजना के तहत विस्तृत सर्वे कराया जाएगा, ताकि समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि मौजूदा SOP के तहत जिला स्तर के अधिकारी बंदर आतंक को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।

इससे पहले याचिकाकर्ताओं के वकील ने विभिन्न जिलों में बंदरों के हमलों से निवासियों को हो रही परेशानियों और जानवरों के सामने भोजन की कमी की समस्या को भी अदालत के समक्ष रखा। PTI COR RAJ KIS KVK KVK

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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