इसरो ने श्रीहरिकोटा में SSLV के तीसरे चरण का परीक्षण किया, अहम उपलब्धि हासिल

**EDS, YEARENDERS 2025: NEWS AND NEWSMAKERS** Bengaluru: Indian Space Research Organisation (ISRO) Chairman V Narayanan addresses a press conference, in Bengaluru, Karnataka, Thursday, Oct. 23, 2025. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI10_23_2025_000057B)(PTI12_27_2025_000406B)

बेंगलुरु, 31 दिसंबर (पीटीआई) — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सॉलिड मोटर स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) के तीसरे चरण के उन्नत संस्करण का सफल स्थैतिक परीक्षण किया है।

इसरो के अनुसार, यह परीक्षण मंगलवार को किया गया। स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) तीन चरणों वाला पूर्णत: सॉलिड ईंधन आधारित प्रक्षेपण यान है, जिसे इसरो ने औद्योगिक उत्पादन के अनुकूल विकसित किया है। यह कम समय में बार-बार प्रक्षेपण (लॉन्च-ऑन-डिमांड) की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम है।

इसरो ने अपने बयान में कहा, “ऊपरी या तीसरा चरण प्रक्षेपण यान को लगभग 4 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति प्रदान करता है। इसमें मोनोलिथिक कंपोजिट मोटर केस और फ्री-स्टैंडिंग नोज़ल डाइवर्जेंट का उपयोग किया गया है, जिससे चरण का निष्क्रिय भार कम होता है।”

अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि इस स्थैतिक परीक्षण के जरिए SSLV के तीसरे चरण (SS3) के उन्नत संस्करण को सत्यापित किया गया है, जिसमें कार्बन-एपॉक्सी मोटर केस का इस्तेमाल किया गया है। इससे चरण का वजन काफी कम हुआ है और SSLV की पेलोड क्षमता में लगभग 90 किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।

इसरो के अनुसार, “इस चरण में इग्नाइटर और नोज़ल सिस्टम के डिज़ाइन में भी सुधार किया गया है, जिससे यह अधिक कुशल और मजबूत बन गया है। नोज़ल नियंत्रण के लिए कम-शक्ति नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ फॉल्ट-टॉलरेंट इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्टुएशन सिस्टम का उपयोग किया गया है।”

बयान में कहा गया कि उच्च-शक्ति कार्बन फिलामेंट-वाउंड मोटर केस को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की कंपोज़िट इकाई में विकसित किया गया, जबकि सॉलिड मोटर की कास्टिंग सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) की सॉलिड मोटर उत्पादन सुविधाओं में की गई।

इसरो ने बताया, “108 सेकंड की परीक्षण अवधि के दौरान सभी मापे गए मान अपेक्षित अनुमानों के करीब पाए गए। इस सफल स्थैतिक परीक्षण के साथ, SS3 मोटर का उन्नत संस्करण उड़ान में उपयोग के लिए योग्य घोषित किया गया है।”

इसरो के अनुसार, इस वर्ष देश में अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए सॉलिड मोटर निर्माण क्षमता बढ़ाने हेतु कई नई सुविधाएं शुरू की गई हैं। जुलाई 2025 में श्रीहरिकोटा में सॉलिड मोटर उत्पादन सुविधाएं चालू की गईं, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई।

इसके अलावा, सितंबर 2025 में केरल के अलुवा स्थित अमोनियम पर्क्लोरेट संयंत्र में अमोनियम पर्क्लोरेट की दूसरी उत्पादन लाइन शुरू की गई, जिससे सॉलिड मोटरों के लिए आवश्यक इस प्रमुख घटक की उत्पादन क्षमता दोगुनी हो गई।

इस वर्ष SDSC में सॉलिड मोटर उत्पादन लाइन के लिए एक स्वदेशी 10-टन वर्टिकल मिक्सर भी स्थापित किया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा सॉलिड प्रोपेलेंट मिक्सिंग उपकरण है।

साथ ही, SDSC में स्थित सॉलिड मोटर प्रोडक्शन एंड स्टैटिक टेस्टिंग (SMPST) सुविधाओं ने एक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप द्वारा विकसित लॉन्च व्हीकल के पहले कक्षीय प्रक्षेपण के लिए सॉलिड मोटर का निर्माण और स्थैतिक परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया है।

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