ईरान के सर्वोच्च नेता बोले—ट्रंप को खुश करने के लिए प्रदर्शनकारी ‘अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं’

In this photo released by the official website of the office of the Iranian supreme leader, Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei waves in his meeting with a group of students in Tehran, Iran, Monday, Nov. 3, 2025. AP/PTI(AP11_03_2025_000357B)

दुबई, 9 जनवरी (एपी) ईरान के सर्वोच्च नेता ने शुक्रवार को संकेत दिया कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब रात भर लोग खिड़कियों से नारे लगाते और सड़कों पर मार्च करते देखे गए, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के समर्थन के वादे को सीधी चुनौती मिली।

सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप को “ईरानियों के खून से सने हाथों वाला” बताते हुए खारिज कर दिया। ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित फुटेज में उनके समर्थकों को “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते दिखाया गया।

खामेनेई ने ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा, “प्रदर्शनकारी किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं।” वॉशिंगटन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, हालांकि ट्रंप ने यह दोहराया कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या होती है तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा।

ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार द्वारा इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद किए जाने के बावजूद, कार्यकर्ताओं द्वारा साझा किए गए छोटे ऑनलाइन वीडियो में कथित तौर पर तेहरान और अन्य इलाकों में लोग अलाव के आसपास सरकार विरोधी नारे लगाते और सड़कों पर बिखरा मलबा दिखाते नजर आए। ईरानी सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल के “आतंकी एजेंटों” ने आगजनी की और हिंसा भड़काई। उसने “हताहतों” की बात कही, लेकिन कोई विवरण नहीं दिया।

संचार बंद होने के कारण प्रदर्शनों का पूरा दायरा तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन यह उन प्रदर्शनों में एक और बड़ा उभार था, जो पहले ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए थे और अब कई वर्षों में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से लगातार तेज होते गए हैं।

इन प्रदर्शनों को यह भी परख माना जा रहा है कि क्या ईरानी जनता क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी के आह्वान से प्रभावित होती है। उनके गंभीर रूप से बीमार पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से ठीक पहले ईरान छोड़कर चले गए थे। पहलवी ने गुरुवार रात प्रदर्शन का आह्वान किया था और शुक्रवार शाम 8 बजे फिर से प्रदर्शन करने की अपील की है।

प्रदर्शनों में शाह के समर्थन में नारे भी लगाए गए हैं—जो अतीत में मौत की सजा का कारण बन सकता था—लेकिन यह उन गुस्से की तीव्रता को दर्शाता है, जो ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था से उपजा है।

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी की वरिष्ठ फेलो हॉली डैग्रेस ने कहा, “प्रदर्शनों का रुख तब बदला जब पूर्व क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार रात 8 बजे ईरानियों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया।” उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पोस्ट से साफ हो गया कि ईरानियों ने इस आह्वान को गंभीरता से लिया और इस्लामी गणराज्य को हटाने के लिए प्रदर्शन किए।”

उन्होंने जोड़ा, “इसी वजह से इंटरनेट बंद किया गया—ताकि दुनिया ये प्रदर्शन न देख सके। दुर्भाग्य से, इससे सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों को मारने की आड़ भी मिल सकती है।”

इंटरनेट बंद होने से पहले गुरुवार रात के प्रदर्शन

गुरुवार शाम 8 बजे जैसे ही समय हुआ, तेहरान के कई इलाकों में नारेबाजी शुरू हो गई, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया। नारों में “तानाशाह मुर्दाबाद!” और “इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद!” शामिल थे। कुछ लोग शाह की प्रशंसा करते हुए चिल्ला रहे थे—“यह आखिरी लड़ाई है! पहलवी लौटेंगे!” संचार पूरी तरह कटने से पहले हजारों लोग सड़कों पर नजर आए।

पहलवी ने कहा, “आज रात ईरानियों ने अपनी आज़ादी की मांग की। जवाब में ईरानी शासन ने संचार की सभी लाइनें काट दीं—इंटरनेट बंद किया, लैंडलाइन काट दी और संभव है कि सैटेलाइट सिग्नल भी जाम करने की कोशिश करे।”

उन्होंने यूरोपीय नेताओं से ट्रंप के साथ मिलकर “शासन को जवाबदेह ठहराने” का वादा करने की अपील की। “मैं उनसे आग्रह करता हूं कि ईरानी जनता की आवाज़ और इच्छा को सुना और देखा जा सके, इसके लिए सभी तकनीकी, वित्तीय और कूटनीतिक संसाधनों का इस्तेमाल करें। मेरे साहसी हमवतन की आवाज़ों को दबने न दें,” उन्होंने कहा।

पहलवी ने संकेत दिया कि वह प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की योजनाएं बताएंगे। इज़राइल के प्रति उनके समर्थन को लेकर पहले भी आलोचना होती रही है—खासकर जून में ईरान पर इज़राइल द्वारा लड़ी गई 12-दिवसीय युद्ध के बाद। कुछ प्रदर्शनों में शाह के समर्थन के नारे लगे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह पहलवी के प्रति समर्थन है या 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले के दौर में लौटने की इच्छा।

इंटरनेट बंद होने से ईरान की सरकारी और अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियां भी प्रभावित हुईं। शुक्रवार सुबह 8 बजे सरकारी टीवी का बयान प्रदर्शनों पर पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया था। टीवी ने हिंसा और हताहतों का दावा किया, लेकिन विवरण नहीं दिया। उसने यह भी कहा कि “निजी कारें, मोटरसाइकिलें, मेट्रो जैसे सार्वजनिक स्थल, दमकल वाहन और बसें” जलाई गईं।

प्रदर्शनकारियों की मौत पर ट्रंप की चेतावनी दोहराई

हाल के वर्षों में ईरान में कई बार देशव्यापी प्रदर्शन हुए हैं। प्रतिबंध सख्त होने और 12-दिवसीय युद्ध के बाद हालात बिगड़ने से दिसंबर में ईरानी रियाल गिरकर 1 डॉलर के मुकाबले 14 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद जल्द ही प्रदर्शन शुरू हो गए।

यह स्पष्ट नहीं है कि ईरानी अधिकारी अब तक प्रदर्शनकारियों पर और सख्ती क्यों नहीं कर रहे। ट्रंप ने पिछले हफ्ते चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या” करता है तो अमेरिका “उनकी मदद के लिए आएगा।” गुरुवार को प्रसारित एक साक्षात्कार में ट्रंप ने इस चेतावनी को दोहराया।

ट्रंप ने कहा, “ईरान को बहुत सख्ती से बता दिया गया है—इससे भी ज्यादा सख्ती से जितनी मैं आपसे अभी बात कर रहा हूं—कि अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

पहलवी से मिलने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि इस समय ऐसा करना शायद उचित नहीं होगा। फॉक्स न्यूज पर सीन हैनिटी के साथ साक्षात्कार में ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया कि 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता खामेनेई ईरान छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।

“वह कहीं जाने की सोच रहे हैं,” ट्रंप ने कहा। “स्थिति बहुत खराब होती जा रही है।” (एपी)

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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