ईरान में कुछ भारतीय छात्र अब भी निकासी का इंतजार कर रहे, बाकी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट

ईरान-इज़राइल सैन्य संघर्ष के बीच, ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की निकासी और सुरक्षा को लेकर भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय है। तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की छात्रा मेहरीन जफ्फर समेत 70 से अधिक भारतीय छात्र अब भी निकासी का इंतजार कर रहे हैं। कई छात्रों को सुरक्षा के लिहाज से बेसमेंट या सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है, लेकिन वे डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं।

सरकार ने तेहरान जैसे संवेदनशील शहरों से छात्रों को निकालकर क़ोम जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित शहरों में भेजा है—करीब 600 भारतीय छात्रों को क़ोम शिफ्ट किया गया है। वहीं, उर्मिया में पढ़ रहे 110 छात्रों को भारतीय दूतावास की मदद से आर्मेनिया सीमा पार कराई गई है और वे राजधानी येरेवन पहुंच चुके हैं। इन छात्रों की फ्लाइट दिल्ली के लिए बुधवार को निर्धारित है और सभी जरूरी इंतजाम भारतीय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे हैं।

तेहरान, क़ोम और अन्य शहरों में रह रहे छात्रों ने बताया कि इंटरनेट कमजोर होने के कारण वे अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और लगातार डर का माहौल बना हुआ है। कुछ छात्र अब भी ईरान के अन्य शहरों, जैसे कि केर्मानशाह और क़ोम में फंसे हैं और दूतावास से जल्द निकासी की अपील कर रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और दूतावास लगातार छात्रों और भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं और हर संभव मदद का भरोसा दिला रहे हैं। दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन भी जारी की है और बाकी भारतीयों को भी शहर छोड़ने की सलाह दी है।

संक्षेप में, ईरान में फंसे कुछ भारतीय छात्र अब भी निकासी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है और 110 छात्र आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने की प्रक्रिया में हैं।