
दुबई, 23 जनवरी (एपी) ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों पर की गई खूनी कार्रवाई में मरने वालों की संख्या शुक्रवार तक कम से कम 5,002 पहुंच गई है। कार्यकर्ताओं ने यह दावा करते हुए चेतावनी दी कि अभी और भी कई लोगों के मारे जाने की आशंका है, क्योंकि देश के इतिहास का सबसे व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है।
ईरान से जानकारी बाहर आना अब भी बेहद मुश्किल बना हुआ है, क्योंकि 8 जनवरी को अधिकारियों ने इंटरनेट के जरिए दुनिया से संपर्क काट दिया था। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह मध्य पूर्व के और करीब पहुंच रहा है—जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात पत्रकारों से बात करते हुए “आर्माडा” करार दिया।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी ने यह आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि मारे गए लोगों में 4,716 प्रदर्शनकारी, 203 सरकार से जुड़े लोग, 43 बच्चे और 40 ऐसे आम नागरिक थे जो प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। एजेंसी ने यह भी कहा कि अधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक गिरफ्तारी अभियान में 26,800 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
एजेंसी के आंकड़े ईरान में पहले हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी सटीक रहे हैं और ये ईरान के भीतर सक्रिय कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए मौतों की पुष्टि पर आधारित हैं। यह आंकड़ा दशकों में ईरान में किसी भी अन्य विरोध या अशांति के दौरान हुई मौतों से अधिक है और 1979 की इस्लामी क्रांति के समय की अराजकता की याद दिलाता है।
ईरान सरकार ने बुधवार को पहली बार अपना आधिकारिक आंकड़ा जारी करते हुए कहा कि 3,117 लोग मारे गए हैं। सरकार के अनुसार, 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों में 2,427 नागरिक और सुरक्षा बलों के सदस्य थे, जबकि बाकी को “आतंकवादी” बताया गया। अतीत में ईरान की धार्मिक सरकार पर अशांति के दौरान मौतों की संख्या कम बताने या न बताने के आरोप लगते रहे हैं।
एसोसिएटेड प्रेस स्वतंत्र रूप से मौतों की संख्या की पुष्टि नहीं कर सका है, क्योंकि अधिकारियों ने इंटरनेट बंद कर रखा है और अंतरराष्ट्रीय कॉल भी रोकी गई हैं। इसके अलावा, ईरान में पत्रकारों की स्थानीय स्तर पर रिपोर्टिंग की क्षमता भी सीमित कर दी गई है। सरकारी टीवी पर बार-बार यह दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी “उपद्रवी” हैं और अमेरिका व इज़राइल से प्रेरित हैं, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है।
यह नया आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप ने प्रदर्शनों को लेकर दो “रेड लाइन” खींची हैं—शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और तेहरान द्वारा सामूहिक फांसी। ईरान के अटॉर्नी जनरल और अन्य अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को “मोहारेब” यानी “खुदा के दुश्मन” कहा है। इस आरोप में मौत की सजा का प्रावधान है। इसी आरोप का इस्तेमाल 1988 में कथित तौर पर कम से कम 5,000 लोगों की सामूहिक फांसी के लिए किया गया था।
इस बीच अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व की ओर और सैन्य संसाधन भेजे हैं, जिनमें विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ चल रहे युद्धपोत शामिल हैं, जो दक्षिण चीन सागर से रवाना हुए हैं।
अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने, नाम न छापने की शर्त पर, गुरुवार को बताया कि लिंकन स्ट्राइक ग्रुप फिलहाल हिंद महासागर में है।
ट्रंप ने गुरुवार को एयर फोर्स वन में कहा कि अमेरिका जहाजों को ईरान की ओर “एहतियातन” भेज रहा है।
उन्होंने कहा, “हमारा एक विशाल बेड़ा उस दिशा में जा रहा है और शायद हमें इसका इस्तेमाल न करना पड़े।”
ट्रंप ने यह भी जिक्र किया कि जून में इज़राइल द्वारा ईरान पर 12 दिन के युद्ध शुरू करने से पहले, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई दौर की बातचीत की थी। उस युद्ध के दौरान अमेरिकी युद्धक विमानों ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। ट्रंप ने ईरान को सैन्य कार्रवाई की धमकी देते हुए कहा कि इससे पहले यूरेनियम संवर्धन ठिकानों पर किए गए अमेरिकी हमले “मूंगफली जैसे” लगेंगे।
उन्होंने कहा, “हमें हमला करने से पहले ही उन्हें समझौता कर लेना चाहिए था।” (एपी)
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