ईरान में बिगड़ती अर्थव्यवस्था से भड़के बढ़ते प्रदर्शनों में कम से कम 7 लोगों की मौत

Protesters march in downtown Tehran, Iran.(AP)

दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, 2 जनवरी (AP): ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण भड़के प्रदर्शनों ने गुरुवार को इस्लामिक गणराज्य के ग्रामीण प्रांतों तक फैलते हुए हिंसक रूप ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है। यह इन प्रदर्शनों में दर्ज की गई पहली मौतें हैं।

इन मौतों से संकेत मिलता है कि ईरान की धार्मिक सत्ता अब प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है। राजधानी तेहरान में जहां प्रदर्शन धीमे पड़े हैं, वहीं देश के अन्य हिस्सों में यह तेज़ी से फैल रहे हैं। बुधवार को दो और गुरुवार को पांच लोगों की मौत हुई, जो चार अलग-अलग शहरों में हुईं। ये क्षेत्र मुख्य रूप से ईरान के लूर जातीय समूह का गढ़ माने जाते हैं।

ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं, जब 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में आंदोलन भड़क उठे थे। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शन अभी देशव्यापी नहीं हुए हैं और न ही वे उतने तीव्र हैं, जितने अमीनी की मौत के बाद देखे गए थे। अमीनी को कथित तौर पर हिजाब सही ढंग से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

सबसे अधिक हिंसा लोरस्तान प्रांत के अज़ना शहर में देखी गई, जो तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सड़कों पर आगजनी और गोलियों की आवाज़ के बीच लोगों को “शर्म करो! शर्म करो!” चिल्लाते हुए सुना गया। अर्ध-सरकारी फ़ार्स समाचार एजेंसी ने यहां तीन लोगों की मौत की पुष्टि की। हालांकि, सरकारी मीडिया ने इस हिंसा को लेकर सीमित जानकारी ही दी। 2022 में भी पत्रकारों को प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के चलते गिरफ्तार किया गया था।

चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लॉरदेगान शहर में भी प्रदर्शन हुए, जहां वीडियो में सड़क पर जुटे लोगों और पृष्ठभूमि में गोलियों की आवाज़ सुनी गई। फ़ार्स ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि यहां गुरुवार को दो लोगों की मौत हुई। वाशिंगटन स्थित अब्दोर्रहमान बोरूमंद सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स ने दावा किया कि दोनों मृतक प्रदर्शनकारी थे।

इस्फहान प्रांत के फुलादशहर में भी एक व्यक्ति की मौत की सूचना है, जिसे कार्यकर्ता समूहों ने पुलिस फायरिंग का नतीजा बताया। वहीं, बुधवार रात हुए एक अन्य प्रदर्शन में 21 वर्षीय बसीज स्वयंसेवक की मौत हो गई। सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने उसकी मौत की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी। बसीज से जुड़े एक समाचार नेटवर्क ने प्रदर्शनकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

लोरस्तान प्रांत के उप-गवर्नर सईद पूरअली ने कहा कि ये प्रदर्शन आर्थिक दबाव, महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन के कारण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, लेकिन मांगों का दुरुपयोग नहीं होने देना चाहिए। कोहदश्त शहर में हुए प्रदर्शनों के बाद 20 लोगों की गिरफ्तारी की गई और हालात शांत होने का दावा किया गया।

ईरान में हालिया प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह मुद्रा संकट भी है। देश की मुद्रा रियाल तेजी से गिर रही है और अब एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल हो गई है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की सुधारवादी सरकार बातचीत के संकेत दे रही है, लेकिन आर्थिक हालात पर उनके नियंत्रण की सीमाएं भी सामने आई हैं।

सरकारी टीवी ने सात लोगों की गिरफ्तारी की सूचना दी है, जिनमें से पांच पर राजशाही समर्थक होने का आरोप है, जबकि दो के यूरोप स्थित समूहों से जुड़े होने की बात कही गई है। इसके अलावा, सुरक्षा बलों द्वारा 100 तस्करी की गई पिस्तौलें जब्त किए जाने की भी जानकारी दी गई।

ईरान सरकार ने बुधवार को ठंड का हवाला देते हुए देश के कई हिस्सों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, जिसे लोगों को राजधानी से बाहर भेजने की कोशिश माना जा रहा है। गुरुवार और शुक्रवार ईरान में साप्ताहिक अवकाश होते हैं, जबकि शनिवार को इमाम अली की जयंती है।

हालांकि प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों से शुरू हुए, लेकिन इनमें सरकार और धार्मिक सत्ता के खिलाफ नारे भी लगाए जा रहे हैं। हाल के महीनों में ईरान इज़राइल के साथ 12 दिन के युद्ध और अमेरिकी हमलों के बाद पहले से ही दबाव में है। ईरान ने दावा किया है कि वह फिलहाल कहीं भी यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है, ताकि पश्चिमी देशों के साथ संभावित वार्ता का रास्ता खुले, लेकिन अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू न करने की चेतावनी दी है।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

एसईओ टैग्स: #स्वदेशी, #न्यूज़, ईरान में बिगड़ती अर्थव्यवस्था से भड़के बढ़ते प्रदर्शनों में कम से कम 7 लोगों की मौत