
दुबई, 8 मार्च (एपी) – ईरान युद्ध के दौरान रविवार को हमलों का दायरा खतरनाक रूप से नागरिक बुनियादी ढांचे तक फैल गया। बहरीन ने ईरान पर उसके एक डीसेलिनेशन प्लांट (समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र) पर हमला करने का आरोप लगाया, जो खाड़ी देशों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है। इज़राइली हमलों के बाद तेहरान में तेल डिपो से धुआं उठता देखा गया, जिससे पर्यावरण संबंधी चेतावनियां जारी की गईं।
क्षेत्र में बढ़ते गुस्से के संकेत देते हुए अरब लीग के प्रमुख ने पड़ोसी देशों पर हमले करने की ईरान की “लापरवाह नीति” की कड़ी आलोचना की। खाड़ी देशों पर पहले ही सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोन से हमले हो चुके हैं, और युद्ध के नौवें दिन ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका के ठिकानों पर हमले बढ़ाने की कसम खाई।
सऊदी अरब ने युद्ध में पहली मौतों की पुष्टि की है। वहां एक सैन्य प्रोजेक्टाइल रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे भारतीय और बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य बांग्लादेशी घायल हुए। खाड़ी देशों में युद्ध से हुई अधिकांश मौतें विदेशी कामगारों और निवासियों की बताई जा रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ संयुक्त अभियान जारी रखने का संकल्प जताया है, हालांकि वॉशिंगटन के घोषित युद्ध उद्देश्यों में बदलाव दिखाई देता रहा है। ट्रंप ने एबीसी न्यूज से कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद ईरान में सत्ता में कौन आएगा, इसमें भी वह भूमिका चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मंजूरी के बिना नया नेता “ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा।”
इज़राइल में सेना ने युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। सेना के अनुसार दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाते समय दो सैनिक मारे गए। वहीं दोपहर के हमले में इज़राइल में तीन लोग घायल हुए।
28 फरवरी को इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता की भी मौत हो गई थी। अधिकारियों के अनुसार अब तक ईरान में कम से कम 1,230, लेबनान में 397 और इज़राइल में 11 लोगों की मौत हो चुकी है।
अमेरिकी सेना ने बताया कि 1 मार्च को सऊदी अरब में सैनिकों पर हुए ईरानी हमले में घायल एक अमेरिकी सैनिक की भी मौत हो गई। इस युद्ध में अब तक सात अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।
इस संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है, हवाई यात्रा बाधित की है और हजारों अमेरिकी व इज़राइली हवाई हमलों के बाद ईरान की नेतृत्व व्यवस्था कमजोर हो गई है।
ईरानी राष्ट्रपति का सख्त रुख
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक दिन पहले दिए गए नरम बयान से पीछे हटते हुए सख्त रुख अपनाया। उन्होंने पहले खाड़ी देशों की जमीन पर हुए हमलों के लिए माफी मांगी थी, लेकिन ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने तुरंत इसका विरोध करते हुए कहा था कि युद्ध रणनीति नहीं बदलेगी।
पेज़ेश्कियन ने रविवार को कहा, “वे हम पर जितना अधिक दबाव डालेंगे, हमारा जवाब उतना ही मजबूत होगा। हमारा ईरान धमकी, उत्पीड़न या आक्रामकता के सामने आसानी से नहीं झुकेगा और कभी झुका भी नहीं है।” उन्होंने पड़ोसी देशों से अमेरिका और इज़राइल के हमलों में हिस्सा न लेने की अपील भी की।
अमेरिकी हमले खाड़ी अरब सरकारों की ओर से नहीं बल्कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों से किए गए हैं।
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसनी-एजेई ने शनिवार को एक्स पर लिखा, “क्षेत्र के कुछ देशों की भौगोलिक स्थिति—खुले तौर पर या गुप्त रूप से—दुश्मन के हाथ में है और उन स्थानों का इस्तेमाल हमारे देश के खिलाफ आक्रामकता के लिए किया जा रहा है। इन ठिकानों पर तीव्र हमले जारी रहेंगे।”
मोहसनी-एजेई और पेज़ेश्कियन उस तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद का हिस्सा हैं जो ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश का नेतृत्व संभाल रही है। ईरान अब नए सर्वोच्च नेता के चयन का इंतजार कर रहा है।
डीसेलिनेशन और तेल सुविधाओं पर हमले
बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान द्वारा उनकी ओर अतिरिक्त मिसाइलें दागे जाने की जानकारी दी।
बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान ने अंधाधुंध नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया और उसके एक डीसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचाया, हालांकि वहां की बिजली और जल प्राधिकरण ने कहा कि पानी और बिजली की आपूर्ति जारी है।
ये संयंत्र क्षेत्र के लाखों निवासियों और फंसे हुए हजारों यात्रियों को पानी उपलब्ध कराते हैं, इसलिए इस हमले ने रेगिस्तानी देशों में बड़े संकट की आशंका बढ़ा दी है।
अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय भी बहरीन में है। वहां होटल, बंदरगाह और रिहायशी इमारतों पर भी हमले हुए, जिनमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई।
इससे पहले ईरान ने भी आरोप लगाया था कि अमेरिकी हवाई हमले में उसका एक डीसेलिनेशन प्लांट क्षतिग्रस्त हुआ। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में क़ेश्म द्वीप पर हुए हमले से 30 गांवों की पानी आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा, “यह मिसाल अमेरिका ने कायम की है, ईरान ने नहीं।”
जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता यूएस नेवी कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि “अमेरिकी बल नागरिकों को निशाना नहीं बनाते।”
ईरानी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इज़राइल के रातभर के हमलों में चार तेल भंडारण टैंकर और एक पेट्रोलियम ट्रांसफर टर्मिनल निशाना बने, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। तेहरान के प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि धुआं इतना घना था कि ऐसा लग रहा था जैसे सूरज निकला ही नहीं।
इज़राइल की सेना ने कहा कि इन तेल डिपो का इस्तेमाल ईरान की सेना मिसाइल लॉन्च करने के लिए ईंधन के रूप में कर रही थी।
ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी के अनुसार देशभर में लगभग 10,000 नागरिक ढांचे—जिनमें घर, स्कूल और लगभग तीन दर्जन स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं—क्षतिग्रस्त हुए हैं। संस्था ने तेहरान के लोगों को जहरीले वायु प्रदूषण और अम्लीय वर्षा के खतरे से बचने के लिए सावधानी बरतने की चेतावनी भी दी।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ ने कहा कि युद्ध का असर तेल उद्योग पर गंभीर हो सकता है और जल्द ही तेल का उत्पादन व बिक्री करना कठिन हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरे के कारण इराक समेत कुछ क्षेत्रीय उत्पादकों ने उत्पादन कम कर दिया है।
हालांकि ईरान की राष्ट्रीय तेल उत्पाद वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक वेयस करामी ने सरकारी समाचार एजेंसी को बताया कि देश में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है।
लेबनान में पांच लाख से अधिक लोग विस्थापित
लेबनान ने कहा है कि इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक सप्ताह की लड़ाई में पांच लाख से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं।
असल संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराने वालों की संख्या 5,17,000 है। इज़राइल ने पिछले सप्ताह दक्षिणी लेबनान के कई गांवों और बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के निवासियों से इलाका खाली करने को कहा है क्योंकि लड़ाई तेज हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्री रकान नासेरुद्दीन ने बताया कि मरने वालों में 83 बच्चे और 82 महिलाएं शामिल हैं।
बेरूत में कई परिवार स्कूलों में शरण लिए हुए हैं, कुछ लोग कारों में या भूमध्यसागर के किनारे खुले स्थानों में रह रहे हैं, जहां ठंड से बचने के लिए लकड़ी जलाई जा रही है। सरकार ने हजारों लोगों को शरण देने के लिए एक खेल स्टेडियम खोलने की घोषणा की है।
इज़राइल ने पिछले सप्ताह अपना नया सैन्य अभियान तब शुरू किया जब युद्ध के शुरुआती दिनों में हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल की ओर रॉकेट दागे थे। ये हमले नवंबर 2024 के युद्धविराम के बाद सबसे तीव्र माने जा रहे हैं।
इज़राइल लगभग रोज दक्षिणी लेबनान में हमले कर रहा है और उसका कहना है कि हिज़्बुल्लाह वहां अपने ठिकाने फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा था।
हिज़्बुल्लाह ने पिछले सप्ताह कहा कि एक साल से अधिक समय तक युद्धविराम का पालन करने के बाद अब उसका धैर्य खत्म हो गया है और उसके पास लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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