उच्च-स्तरीय वार्ता में भारत-इज़राइल, सुरक्षा और व्यापार सहयोग को मजबूत करने पर सहमति

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Nov. 4, 2025, External Affairs Minister S Jaishankar with Israel's Foreign Affairs Minister Gideon Sa'ar during a meeting, in New Delhi. (@gidonsaar/X via PTI Photo)(PTI11_04_2025_000187B) *** Local Caption ***

नई दिल्ली, 4 नवंबर (PTI) भारत और इज़राइल ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” के वैश्विक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने तथा व्यापार, अवसंरचना और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। साथ ही, नई दिल्ली ने उम्मीद जताई कि अमेरिका द्वारा मध्यस्थता किए गए गाजा शांति समझौते से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके इज़राइली समकक्ष गिदोन सार के बीच हुई वार्ता में ये मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों पक्ष अगले कुछ महीनों में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के संदर्भ में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के कार्यान्वयन पर भी चर्चा हुई।

बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत और इज़राइल दोनों आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमने कठिन समय में एक-दूसरे का साथ दिया है और उच्च स्तर के भरोसे और विश्वसनीयता वाला संबंध बनाया है। हमारे दोनों देश आतंकवाद से एक समान खतरे का सामना कर रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता के वैश्विक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं।”

इसके जवाब में सार, जो तीन दिन की भारत यात्रा पर हैं, ने कहा कि इज़राइल गाजा में हमास, लेबनान में हिज़्बुल्लाह और यमन में हौती जैसे “कट्टरपंथी आतंकवादी राज्यों” का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा, “हमास के आतंकवादी शासन का खात्मा राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप की योजना का केंद्र है। हमास को निरस्त्र किया जाना चाहिए और गाजा का सैन्यीकरण समाप्त होना चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं होगा।”

सार ने यह भी याद किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमास के 7 अक्टूबर हमले के बाद इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को फोन करने वाले पहले विश्व नेता थे।

उन्होंने कहा, “हम इसे नहीं भूलेंगे।”

गाजा शांति योजना पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत हाल के घटनाक्रमों पर “बहुत गहन नज़र” बनाए हुए है।

उन्होंने कहा, “हम बंधकों की वापसी और उन लोगों के अवशेषों का स्वागत करते हैं जिनकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हुई। भारत गाजा शांति योजना का समर्थन करता है और आशा करता है कि यह दीर्घकालिक समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगी।”

20-सूत्रीय गाजा शांति योजना ने संघर्षविराम में मदद की है। इसके पहले चरण के तहत हमास ने सभी बचे बंधकों को रिहा किया, जबकि इज़राइल ने सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा।

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।

जयशंकर ने कहा, “हमारे द्विपक्षीय निवेश समझौते का हालिया निष्कर्ष इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह भी उल्लेखनीय है कि कृषि, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और वित्त से जुड़े आपके मंत्री हाल ही में भारत आ चुके हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत ने रेल, सड़क और बंदरगाह अवसंरचना में नई क्षमताएँ विकसित की हैं और भारतीय व्यवसाय इज़राइल में अवसर तलाशने के इच्छुक हैं।

जयशंकर ने कहा कि कृषि, नवाचार, सेमीकंडक्टर्स और साइबर क्षेत्रों में भी संयुक्त कार्य आगे बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि “हमारी मोबिलिटी समझ के तहत भारतीय श्रमिक अब इज़राइल में बढ़ती संख्या में मौजूद हैं। उनके संबंधित कुछ मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है और हम इस पहलू को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि “हमारे रणनीतिक सहयोग को देखते हुए, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी अत्यंत मूल्यवान है।”

PTI

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