नैनीताल, 22 अगस्त (पीटीआई): उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अदालत में वकीलों की आधिकारिक ‘ड्रेस कोड’ में टोपी को शामिल करने की एक याचिका पर सुनवाई की।
अधिवक्ता विनोद नौटियाल ने यह जनहित याचिका (PIL) दायर की है।
अपनी याचिका में, नौटियाल ने 2001 की एक घटना का उल्लेख किया है, जब वरिष्ठ मंत्री नारायण रामदास को एक मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश होना था और गेट पर मौजूद पुलिस ने उन्हें अपनी सफेद गांधी टोपी हटाने के लिए कहा, क्योंकि अदालत कक्ष में बिना टोपी के प्रवेश किया जाता है।
उन्होंने कहा कि उस समय इस बात को लेकर विवाद हुआ था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी को टोपी हटाने के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
नौटियाल ने अदालत कक्ष के अंदर काले या किसी भी रंग की टोपी पहनने की अनुमति मांगी है और ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ से अपने नियमों में संशोधन करने और टोपी को वकीलों की आधिकारिक पोशाक का हिस्सा बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में, खासकर पहाड़ी इलाकों में, बहुत ठंड होती है और शोक या उत्सव के अवसर पर विशेष टोपी पहनने का भी रिवाज है।
नौटियाल ने यह भी कहा कि सिख समुदाय के सदस्यों को अदालत में पगड़ी पहनने की अनुमति है।
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