
देहरादून, 28 जनवरी (पीटीआई) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को कहा कि वह राज्य की मूल पहचान और पवित्रता पर किसी भी हालत में समझौता नहीं करेंगे, भले ही उन्हें “घृणा भाषण” देने वाला कहा जाए।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने की पहली सालगिरह के अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अमेरिकी आधारित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने उनके नाम को कथित “घृणा भाषण देने वालों” की सूची में सबसे ऊपर रखा है।
धामी ने कहा कि वह इस एनजीओ से परिचित नहीं हैं और अपनी जानकारी में यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उनका नाम सूची में शामिल है, उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी किसी के प्रति घृणा नहीं रखी है।
उन्होंने कहा कि एनजीओ ने उनके कथनों को—जबरन धर्मांतरण के खिलाफ, दंगे रोकने के लिए कानून बनाने के विरोध, जिसे उन्होंने भूमि जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद कहा, अतिक्रमण हटाने, राज्य की पहचान और पवित्रता की सुरक्षा, जनसंख्या संरक्षित करने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयास—“घृणा भाषण” के रूप में वर्गीकृत किया है।
“हम किसी भी कीमत पर अपने बच्चों को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं देना चाहते। हम उनमें किसी भी प्रकार का डर या संदेह नहीं डालना चाहते। हम उन्हें सुरक्षित उत्तराखंड विरासत में देना चाहते हैं,” धामी ने कहा।
उन्होंने कहा कि यह उनका संकल्प है, राज्य का संकल्प है, और उन सभी लोगों का भी जो उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ मानते हैं और सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं। PTI DPT RHL MNK MNK
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