उत्तर कोरिया की पार्टी कांग्रेस में किम जोंग उन के बड़े नीतिगत लक्ष्य घोषित करने की उम्मीद

Kim Jong Un

सियोल (दक्षिण कोरिया), 8 फरवरी (एपी)

उत्तर कोरिया इस महीने के अंत में एक बड़ी राजनीतिक बैठक आयोजित करेगा। देश के सरकारी मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी। इस बैठक में नेता किम जोंग उन से अगले पाँच वर्षों के लिए अपनी घरेलू और विदेश नीति की रूपरेखा पेश करने की उम्मीद है।

सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस, जिसे किम ने इससे पहले 2016 और 2021 में बुलाया था, ऐसे समय हो रही है जब उत्तर कोरिया ने वर्षों तक परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को तेज़ी से आगे बढ़ाया है और यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को के साथ उसके रिश्ते गहरे हुए हैं। इन घटनाओं ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ उसके टकराव को और बढ़ा दिया है।

उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो की बैठक किम की निगरानी में हुई, जिसमें फरवरी के अंत में कांग्रेस बुलाने का फैसला लिया गया। हालांकि सरकारी मीडिया ने अभी तक इसकी सटीक तारीख या एजेंडा का खुलासा नहीं किया है।

यह कांग्रेस कई दिनों तक चलने की संभावना है और इसे किम के सत्तावादी नेतृत्व के सुव्यवस्थित प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हाल के हफ्तों में किम ने हथियारों के परीक्षणों का निरीक्षण किया है और सैन्य ठिकानों तथा आर्थिक परियोजनाओं का दौरा किया है। सरकारी मीडिया ने उनकी कथित उपलब्धियों को प्रमुखता से दिखाया है और उनकी “अमर नेतृत्व क्षमता” को देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करने और राष्ट्रीय विकास को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया है।

किम की हालिया गतिविधियों और बयानों से संकेत मिलता है कि वह कांग्रेस का उपयोग “आत्मनिर्भरता” और जन-संगठित प्रयासों के ज़रिये आर्थिक विकास पर जोर देने के लिए करेंगे, साथ ही परमाणु हथियारों से लैस सेना की क्षमताओं को और बढ़ाने की योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं। इसमें पारंपरिक हथियार प्रणालियों का आधुनिकीकरण और उन्हें परमाणु बलों के साथ एकीकृत करना शामिल हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किम अपनी आक्रामक विदेश नीति को भी रेखांकित कर सकते हैं, जो मॉस्को और बीजिंग के साथ बढ़ती निकटता पर आधारित है, जबकि वह प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया के प्रति कठोर रुख अपनाए हुए हैं और “नए शीत युद्ध” की अवधारणा को स्वीकार कर रहे हैं।

अमेरिका के साथ दोबारा कूटनीति शुरू करने को लेकर किम की मंशा स्पष्ट नहीं है। 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी दूसरी शिखर बैठक के बाद, परमाणु कार्यक्रम पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर मतभेद के कारण संबंध बिगड़ गए थे।

जनवरी 2025 में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से किम ने बातचीत के लिए उनके प्रयासों को खारिज कर दिया है। किम का कहना है कि भविष्य की किसी भी वार्ता से पहले वाशिंगटन को उत्तर कोरिया से उसके परमाणु हथियार छोड़ने की शर्त हटानी होगी।

अपने शासन के 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहे किम आज 2021 की पिछली कांग्रेस की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं, जब COVID-19 महामारी के झटके के बीच वह बैठक हुई थी। सत्ता के एक दशक में सबसे कठिन दौर से गुजरते हुए किम ने तब स्वीकार किया था कि उनकी पिछली आर्थिक नीतियां असफल रहीं और 2025 तक के लिए एक नई पाँच वर्षीय विकास योजना पेश की थी।

उन्होंने अपने परमाणु शस्त्रागार के तेज़ विकास का आह्वान किया था और ठोस ईंधन वाले अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों, बहु-वारहेड प्रणालियों, सामरिक परमाणु हथियारों, जासूसी उपग्रहों और परमाणु-संचालित पनडुब्बियों जैसे उन्नत हथियारों की एक लंबी सूची पेश की थी।

किम ने वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का अपने पक्ष में इस्तेमाल किया है। उन्होंने रूस के यूक्रेन पर आक्रमण को हथियार परीक्षण तेज़ करने और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ नजदीकी बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा। पुतिन ने युद्ध के लिए हजारों उत्तर कोरियाई सैनिकों और बड़ी मात्रा में सैन्य उपकरण स्वीकार किए हैं।

किम ने चीन के साथ भी रिश्ते मजबूत किए हैं, जो परंपरागत रूप से उत्तर कोरिया का प्रमुख सहयोगी और आर्थिक सहारा रहा है। सितंबर में वह बीजिंग गए थे, जहां उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लिया और छह वर्षों में पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर बैठक की।

हालांकि किम की कड़ी सूचना नाकेबंदी के कारण सटीक आकलन कठिन है, लेकिन दक्षिण कोरियाई विश्लेषकों का कहना है कि पिछले पाँच वर्षों में उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिले हैं। इसकी वजह चीन के साथ व्यापार में धीरे-धीरे आई बढ़ोतरी और रूस को हथियार निर्यात से उद्योग को मिला प्रोत्साहन हो सकता है।

(एपी)