
लखनऊ, 13 जुलाई (पीटीआई): उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर को संजोने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत 11 प्राचीन किलों और इमारतों के पुनर्स्थापन की योजना शुरू की है, अधिकारियों ने रविवार को बताया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, पर्यटन विभाग इन विरासत स्थलों का कायाकल्प निजी एजेंसियों के माध्यम से करेगा, जो इन स्थलों के डिज़ाइन, विकास, निवेश, संचालन और अंततः उन्हें राज्य सरकार को सौंपने की ज़िम्मेदारी निभाएंगी।
इस पहल का उद्देश्य राज्य की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना है।
इन 11 स्थलों में शामिल हैं:
- तालबेहट किला (ललितपुर)
- रंगगढ़ और भुरागढ़ किला (बांदा)
- वज़ीरगंज बारादरी (गोंडा)
- आलमबाग भवन, गुलिस्तान-ए-इरम और दर्शन विलास (लखनऊ)
- टिकैत राय बारादरी (कानपुर)
- मस्तानी महल और सेनापति महल (महोबा)
- तहरौली किला (झांसी)
- सीताराम महल/कोटवन किला (मथुरा)
अपने अनोखे वास्तुशिल्प और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध ये स्थल हेरिटेज होटल, सांस्कृतिक केंद्र या संग्रहालयों में परिवर्तित किए जाएंगे ताकि पर्यटकों को समृद्ध अनुभव मिल सके।
बयान में कहा गया है कि यह कदम विशेष रूप से बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को लाभान्वित करेगा, जहां विरासत आधारित पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
यह परियोजना सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन साधने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
पर्यटन विभाग ने कहा कि यह प्रयास स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए रास्ते भी खोलेगा।
अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे स्थलों के सफल विकास और कई प्राचीन मंदिरों व तीर्थ स्थलों के चलते राज्य में पर्यटन में भारी वृद्धि देखी गई है। 2024 में ही उत्तर प्रदेश में 65 करोड़ पर्यटकों की आमद दर्ज की गई, बयान में कहा गया।
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