उनके शब्दों में: ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकियों से वैश्विक मंच पर चेतावनियां और तीखी टिप्पणियां

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दावोस, 21 जनवरी (एपी)

मंगलवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच में ग्रीनलैंड संकट और वैश्विक व्यापार को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यूरोपीय नेताओं की ओर से गंभीर चेतावनियां और कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम की ओर से तीखी भाषा सुनने को मिली।

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने और उससे जुड़े व्यापारिक शुल्क लगाने के अपने इरादों को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने, आंखों के संक्रमण के कारण एविएटर चश्मा पहने हुए, “एक नए उपनिवेशवादी दृष्टिकोण” की चेतावनी दी, जो दशकों के सहयोग को कमजोर कर सकता है।

कनाडा के प्रधानमंत्री और पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी ने दुनिया की शीर्ष शक्तियों से नीचे के देशों से “घने बहुपक्षीय सहयोग के नए जाल” को बनाए रखने का आग्रह किया।

वहीं सम्मेलन भवन के प्रवेश कक्ष में न्यूसम सबसे तीखे थे। उन्होंने यूरोपीय नेताओं से कहा,

“अब गंभीर होने का समय है और मिलीभगत करना बंद कीजिए। अब सीधा खड़े होने और मज़बूती दिखाने का वक्त है — रीढ़ दिखाइए।”

यहां प्रमुख नेताओं के कुछ बयान प्रस्तुत हैं:

गेविन न्यूसम (कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर)

उन्होंने कहा,

“मैं इस मिलीभगत को और बर्दाश्त नहीं कर सकता। लोग घुटनों के बल रेंग रहे हैं। मुझे दुनिया के सभी नेताओं के लिए घुटने टेकने वाले पैड लेकर आने चाहिए थे।”

उन्होंने आगे कहा,

“मुझे उम्मीद है लोग समझें कि वे वैश्विक मंच पर कितने दयनीय दिख रहे हैं। कम से कम एक अमेरिकी के तौर पर यह शर्मनाक है।”

ट्रंप के साथ कूटनीति पर उन्होंने कहा,

“डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनीति? वह टी-रेक्स है। या तो आप उससे मेल खाते हैं या वह आपको निगल जाता है। एक ही रास्ता है। जागिए! आखिर सब लोग कहां थे? इस बेकार की शिष्ट कूटनीति को बंद कीजिए। थोड़ी हिम्मत दिखाइए, कुछ रीढ़ दिखाइए।”

इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस के राष्ट्रपति)

अपने भाषण की शुरुआत मज़ाक से करते हुए उन्होंने कहा,

“यह शांति, स्थिरता और पूर्वानुमेयता का समय है।”

फिर चेतावनी देते हुए बोले,

“यह नियमविहीन दुनिया की ओर झुकाव है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून को कुचला जा रहा है और केवल ताकतवर का कानून चल रहा है, और साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएं फिर से सिर उठा रही हैं।”

उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा,

“अमेरिका की ओर से ऐसे व्यापार समझौते थोपे जा रहे हैं जो हमारे निर्यात हितों को कमजोर करते हैं, अधिकतम रियायतें मांगते हैं और खुले तौर पर यूरोप को कमजोर और अधीन बनाने का लक्ष्य रखते हैं। साथ ही नए टैरिफों की अंतहीन श्रृंखला मूल रूप से अस्वीकार्य है, खासकर जब इन्हें क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए।”

मार्क कार्नी (कनाडा के प्रधानमंत्री)

उन्होंने कहा,

“महाशक्तियां फिलहाल अकेले चल सकती हैं। उनके पास बाज़ार का आकार, सैन्य क्षमता और शर्तें तय करने की ताकत है। लेकिन मध्य शक्तियां ऐसा नहीं कर सकतीं।”

उन्होंने कहा,

“महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा की दुनिया में बीच के देशों के पास विकल्प है: या तो आपसी प्रतिस्पर्धा करें या मिलकर तीसरा रास्ता बनाएं।”

उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी मंशा का कड़ा विरोध करते हुए कहा,

“हम ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ मजबूती से खड़े हैं और ग्रीनलैंड के भविष्य को तय करने के उनके विशेष अधिकार का पूरा समर्थन करते हैं।”

स्कॉट बेसेंट (अमेरिकी ट्रेज़री सचिव)

उन्होंने पश्चिमी देशों के बीच तनाव को कमतर बताते हुए कहा,

“मुझे लगता है कि हमारे रिश्ते कभी इतने अच्छे नहीं रहे। घबराहट कम कीजिए, गहरी सांस लीजिए।”

उन्होंने कहा,

“हम राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के बीच में हैं। यूरोप हमारा सहयोगी है, नाटो में अमेरिका की सदस्यता पर कोई सवाल नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम ग्रीनलैंड के भविष्य पर असहमति नहीं रख सकते।”

बार्ट डी वेवर (बेल्जियम के प्रधानमंत्री)

उन्होंने कहा,

“ग्रीनलैंड पर ट्रंप की उकसावों से यूरोप में कई लाल रेखाएं पार हो चुकी हैं।”

उन्होंने कहा,

“खुश गुलाम होना एक बात है, लेकिन दुखी गुलाम होना दूसरी बात है। अगर आप अब पीछे हटे, तो अपनी गरिमा खो देंगे।”

उन्होंने चेतावनी दी,

“या तो हम साथ खड़े होंगे या बंट जाएंगे, और अगर बंटे तो 80 वर्षों के अटलांटिक गठबंधन का अंत हो जाएगा।”

उर्सुला फॉन डेर लेयेन (यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष)

उन्होंने कहा,

“पश्चिम में कूटनीतिक गिरावट हमारे विरोधियों को और मज़बूत करेगी।”

उन्होंने नए टैरिफ को “गलती” बताते हुए कहा,

“यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच पिछले जुलाई में व्यापार समझौता हुआ था। राजनीति में, जैसे व्यापार में, समझौता समझौता होता है।”

उन्होंने कहा,

“अगर यह बदलाव स्थायी है, तो यूरोप को भी स्थायी रूप से बदलना होगा। अब एक नया स्वतंत्र यूरोप बनाने का समय है।”

डोनाल्ड टस्क (पोलैंड के प्रधानमंत्री)

उन्होंने एक्स पर लिखा,

“यूरोपियों को ‘तुष्टीकरण’ से सावधान रहना चाहिए। तुष्टीकरण हमेशा कमजोरी का संकेत होता है। कमजोरी का मतलब है अपमान, परिणाम नहीं।”

उन्होंने कहा,

“यूरोप को न तो अपने दुश्मनों के सामने कमजोर होना चाहिए और न ही अपने मित्रों के सामने।”

(एपी) जीएसपी