
संयुक्त राष्ट्र, 5 फरवरी (पीटीआई)
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर होने वाले आगामी वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए नेतृत्व संभालने पर भारत की सराहना की है। उन्होंने कहा कि एआई अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक “बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा” है और मौजूदा समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
महासचिव गुटेरेस 19–20 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए भारत आएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फ्रांस एआई एक्शन समिट में घोषित यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन होगा। इसका फोकस ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ (लोग, पृथ्वी और प्रगति) के सिद्धांतों पर होगा।
बुधवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीटीआई के सवाल के जवाब में गुटेरेस ने कहा, “मैं वहां मौजूद रहूंगा।”
उन्होंने कहा, “मुझे बेहद खुशी है कि मुझे इस बैठक में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। मेरा मानना है कि आज एआई अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है और हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि देश एक साथ आएं और इस पर चर्चा करें, साथ ही नागरिक समाज को भी हर स्तर पर इसमें शामिल करें।”
उन्होंने आगे कहा, “और इस सम्मेलन के संबंध में नेतृत्व संभालने के लिए मैं भारत की सराहना करता हूं।”
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि शिखर सम्मेलन में उनका संदेश ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट के निष्कर्षों से सीधे तौर पर जुड़ा होगा। उन्होंने बताया कि वह सम्मेलन में शामिल विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों और संस्थाओं को यह समझाएंगे कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की भूमिका क्या होगी, संवादों से क्या अपेक्षाएं हैं और किस तरह विकासशील देशों में क्षमता निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बेहतर तरीके से जुटाया जा सकता है।
गुटेरेस ने कहा, “मेरा मानना है कि एक विकासशील देश होने के नाते, और पहले से मौजूद उल्लेखनीय क्षमताओं के बावजूद, भारत के लिए यह उद्देश्य इस शिखर सम्मेलन का केंद्रीय लक्ष्य है।”
इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ के सिद्धांतों पर आधारित है और ऐसे भविष्य की परिकल्पना करता है, जहां एआई मानवता की प्रगति करे, समावेशी विकास को बढ़ावा दे और हमारी साझा धरती की रक्षा करे।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2024 के समिट ऑफ द फ्यूचर में अपनाए गए ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट ने एक खुले, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल भविष्य की साझा दृष्टि प्रस्तुत की थी। इसके तहत एआई पर एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के गठन का भी संकल्प लिया गया, ताकि वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय चर्चाएं सर्वोत्तम उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित हों।
इसी कड़ी में गुटेरेस ने दुनिया के हर क्षेत्र से 40 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल में शामिल करने की सिफारिश की है।
गुटेरेस ने कहा, “यह पैनल ‘पैक्ट फॉर द फ्यूचर’ के तहत सदस्य देशों द्वारा दिए गए उस जनादेश की सीधी प्रतिक्रिया है, जिसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए बहुपक्षीय समाधान मजबूत करना है। यह एआई ज्ञान अंतर को पाटने और अर्थव्यवस्थाओं व समाजों पर एआई के वास्तविक प्रभावों का आकलन करने के लिए समर्पित पहला वैश्विक, पूर्णतः स्वतंत्र वैज्ञानिक निकाय होगा।”
जिन 40 व्यक्तियों के नाम महासचिव ने महासभा को सिफारिश के लिए भेजे हैं, उनमें बालारामन रविंद्रन भी शामिल हैं। वह आईआईटी मद्रास में डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग (DSAI), वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (WSAI), रॉबर्ट बॉश सेंटर फॉर डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (RBCDSAI) और सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई (CeRAI) के प्रमुख हैं।
(पीटीआई)
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