
नई दिल्ली, 18 फरवरी (पीटीआई) फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस को संप्रभु एआई क्षमता और प्रतिभा विकसित करनी चाहिए, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का विकास कुछ वैश्विक शक्तियों पर अत्यधिक निर्भर हुए बिना मानवता की सेवा कर सके।
भारत-फ्रांस सहयोग को स्वास्थ्य और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री J. P. Nadda और मैक्रों ने बुधवार को All India Institute of Medical Sciences, Delhi में ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ’ (IF-CAIH) का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मैक्रों ने कहा, “भारत और फ्रांस विश्वसनीय एआई प्रणालियां विकसित करने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि हम केवल बाहर विकसित और प्रबंधित तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकते।”
जिम्मेदार शासन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवता की सेवा करनी चाहिए — बच्चों की मजबूत सुरक्षा, एल्गोरिद्म में पारदर्शिता ताकि पक्षपात दूर हो सके, और भाषाई व सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित रखने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ — इन सभी क्षेत्रों में भारत और फ्रांस की साझा दृष्टि है।” उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में नैतिक एआई अपनाने की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और वैज्ञानिक खोजों में तेजी आएगी।
मैक्रों ने छात्रों से संवाद भी किया और युवा शोधकर्ताओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
आईएफ-सीएआईएच एक अग्रणी पहल है, जिसका उद्देश्य एआई आधारित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और नैदानिक नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और समान एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम स्वास्थ्य समाधान में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।
इसका शुभारंभ 18-19 फरवरी को एम्स दिल्ली में आयोजित ‘Rencontres Universitaires Et Scientifiques De Haut Niveau’ (RUSH) कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसका समन्वय फ्रांसीसी दूतावास द्वारा किया गया।
‘इंडो-फ्रेंच फोरम: एआई इन ब्रेन हेल्थ एंड ग्लोबल हेल्थकेयर’ शीर्षक से एक विशेष सत्र में दोनों देशों के प्रमुख वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, नीति-निर्माताओं और शैक्षणिक नेताओं ने भाग लिया।
आईएफ-सीएआईएच की स्थापना Sorbonne University और Paris Brain Institute के साथ एम्स दिल्ली के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत की गई है।
इस पहल में Indian Institute of Technology Delhi और फ्रांस के प्रमुख संस्थानों का शैक्षणिक सहयोग शामिल है, जो एआई, मस्तिष्क स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में अंतःविषय अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर), स्वास्थ्य मानव संसाधन और स्वास्थ्य डेटा के जिम्मेदार उपयोग जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत-फ्रांस के जारी सहयोग को आगे बढ़ाती है।
बयान में कहा गया कि दोनों देशों के शोध निकायों और डिजिटल स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सहयोगात्मक प्रयास वैज्ञानिक खोज को बढ़ावा देने, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने और क्षमता निर्माण व गतिशीलता साझेदारी को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखते हैं।
RUSH 2026 के तहत ‘RUSH – Conversation on Artificial Intelligence’ शीर्षक से 30 मिनट की एक विशेष चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें मैक्रों और दो युवा भारतीय नवप्रवर्तकों — प्रियंका दास राजकाकती और मानव सूरी — ने भाग लिया।
इस सत्र का संचालन फ्रांस की एआई एवं डिजिटल राजदूत क्लारा शापाज़ ने किया और इसमें युवा-नेतृत्व वाले नवाचार, सीमा-पार सहयोग तथा समावेशी और सतत वैश्विक भविष्य के निर्माण में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में ‘फ्रांस और भारत के बीच प्रमुख वैज्ञानिक और शैक्षणिक सहयोग की झलकियां’ विषय पर एक विशेष सत्र भी आयोजित हुआ, जिसका संचालन प्रोफेसर विजय राघवन और डॉ. थिएरी कूलहोन ने किया। इसमें उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रमुख उपलब्धियों और उभरते अवसरों को प्रदर्शित किया गया।
