
शिमला, 11 फरवरी (पीटीआई) हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वित्तीय संकट से निपटने और प्रशासनिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।
यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बिंदल ने कहा, “1971 में राज्य बनने के बाद से कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन इस सरकार के कार्यकाल में पहली बार प्रदेश ने कानून-व्यवस्था, वित्तीय और प्रशासनिक मोर्चों पर पूर्ण विफलता देखी है, जिससे राज्य कर्ज के जाल और अव्यवस्था में धकेल दिया गया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सलाहकारों की फौज नियुक्त कर फिजूलखर्ची की, चुनावी वादों को पूरा नहीं किया, माफियाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम रही और विकास कार्यों को ठप कर दिया।
भाजपा नेता ने कहा, “हत्या, लूट, उगाही और संगठित अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है। नशे का दुरुपयोग पूरे राज्य में फैल गया है, जो अत्यंत चिंता का विषय है और यह सरकार तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की विफलता को दर्शाता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कांगड़ा, चंबा, मंडी और सोलन जिलों में खनन और वन माफिया खुलेआम सक्रिय हैं, जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों पर माफिया के हमलों से भय का माहौल बना हुआ है।
वित्तीय मोर्चे पर बिंदल ने कहा कि सरकार ने “अत्यधिक उधारी और बेलगाम खर्च” की नीति अपनाई है। उन्होंने दावा किया कि 70 से 75 सलाहकारों, विशेष ड्यूटी अधिकारियों और विशेष नियुक्तियों को रखा गया है, जो उच्च वेतन लेते हैं और वाहन व आवास जैसी सुविधाएं प्राप्त करते हैं, जिससे राज्य के खजाने पर करोड़ों रुपये का बोझ पड़ रहा है।
मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए, जिन्हें बाद में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया, बिंदल ने कहा कि उन पर पहले ही भारी सार्वजनिक धन खर्च किया जा चुका है और अब इस मामले को महंगे वकीलों के जरिए आक्रामक रूप से लड़ा जा रहा है, जिससे वित्तीय बोझ और बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लगभग 100 अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ताओं तथा विधि अधिकारियों की नियुक्ति के बावजूद, बड़े मामलों में भारी फीस वाले वरिष्ठ वकीलों को भी नियुक्त किया गया है। बिंदल ने आरोप लगाया कि पसंदीदा लोगों को बोर्डों और निगमों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाकर मौजूदा सरकार ने “पसंदीदा लोगों की सरकार” की पहचान बना ली है।
प्रचार होर्डिंग्स, छवि निर्माण अभियानों, बड़े वाहन काफिलों, नई गाड़ियों की खरीद और बार-बार हेलीकॉप्टर उपयोग पर खर्च पर सवाल उठाते हुए बिंदल ने कहा कि वित्तीय संकट के दावों के बावजूद मितव्ययिता का कोई संकेत नहीं दिखता।
उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव पूर्व दी गई गारंटियों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है, जिनमें 18 से 59 वर्ष की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और हर वर्ष एक लाख सरकारी नौकरियां शामिल थीं, और भविष्य में भी इनकी कोई उम्मीद नहीं दिखती।
महंगाई भत्ता की किस्तों, पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और गरीबों के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं के भुगतान में देरी का आरोप लगाते हुए बिंदल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को पहले की तुलना में अधिक वित्तीय सहायता दी है, जिसमें करों में अधिक हिस्सेदारी और सड़कों, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत बड़ा वित्तपोषण शामिल है।
उन्होंने सवाल किया कि राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से कितने बड़े विकास कार्य किए हैं।
बिंदल ने आरोप लगाया कि मौजूदा वित्तीय संकट वित्तीय कुप्रबंधन का सीधा परिणाम है, लेकिन राज्य सरकार लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इसका दोष केंद्र पर मढ़ने की कोशिश कर रही है। PTI BPL RUK RUK
