एथरटन की मांग: ICC इवेंट्स में ‘व्यवस्थित रूप से तय’ भारत-पाक भिड़ंत पर लगे रोक

लंदन, 7 अक्टूबर (पीटीआई): इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथरटन ने आरोप लगाया है कि “आर्थिक जरूरतों” को पूरा करने के लिए ICC टूर्नामेंट्स में भारत-पाकिस्तान के बीच टकराव को “व्यवस्थित रूप से तय” (neatly arranged) किया जाता है। उन्होंने मांग की है कि दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वियों के बीच क्रिकेट को पूरी तरह से रोक दिया जाए, क्योंकि खेल “व्यापक तनाव और प्रचार का एक जरिया (proxy for broader tensions and propaganda)” बन गया है।

एथरटन के आरोप और तर्क

  1. निश्चित फिक्स्चर का इतिहास:
  2. एथरटन ने ‘द टाइम्स’ के लिए लिखे अपने तीखे कॉलम में कहा कि भारत और पाकिस्तान 2013 से हर ICC इवेंट के ग्रुप स्टेज में एक-दूसरे के खिलाफ खेले हैं। इसमें तीन 50 ओवरों के विश्व कप, पांच टी20 विश्व कप और तीन चैंपियंस ट्रॉफी शामिल हैं।
  3. उन्होंने कहा कि यह फिक्स्चर इस बात पर ध्यान दिए बिना सुनिश्चित किया जाता है कि प्रारंभिक चरण एकल राउंड रॉबिन है या मल्टी-ग्रुप, जहां “फिक्स्चर को सुनिश्चित करने के लिए ड्रॉ को व्यवस्थित रूप से तय किया जाता है।”
  4. आर्थिक प्रेरणा:
  5. एथरटन के अनुसार, इस फिक्स्चर में अत्यधिक आर्थिक प्रभाव (huge economic clout) है। यही एक मुख्य कारण है कि ICC टूर्नामेंट के प्रसारण अधिकार इतने महंगे हैं—सबसे हालिया अधिकार चक्र (2023-27) के लिए लगभग 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  6. उन्होंने तर्क दिया कि द्विपक्षीय मैचों के मूल्य में गिरावट के कारण, ICC इवेंट्स महत्वपूर्ण हो गए हैं, और इसलिए भारत-पाकिस्तान का फिक्स्चर उन लोगों की बैलेंस शीट के लिए महत्वपूर्ण है जिनका अन्यथा खेल में कोई हित नहीं होता।
  7. खेल का दुरुपयोग:
  8. एथरटन ने हालिया एशिया कप की “हरकतों” का हवाला दिया, जहां भारतीय टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया, और एशियाई क्रिकेट परिषद के पाकिस्तानी प्रमुख मोहसिन नकवी के सामने भारतीयों ने उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था।
  9. उन्होंने कहा, “अगर क्रिकेट कभी कूटनीति का माध्यम था, तो अब यह स्पष्ट रूप से व्यापक तनाव और प्रचार का जरिया बन गया है।”

समाधान और भविष्य की मांग

  1. पारदर्शिता की मांग: एथरटन ने कहा कि अब वह समय आ गया है कि ICC इवेंट्स में दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच कम से कम एक बार भिड़ंत सुनिश्चित करने की “मौन रूप से समर्थित व्यवस्था” को समाप्त कर दिया जाए।
  2. स्पष्ट ड्रॉ प्रक्रिया: उन्होंने मांग की कि अगले प्रसारण अधिकार चक्र के लिए, ICC इवेंट्स से पहले फिक्स्चर ड्रॉ पारदर्शी होना चाहिए, और “अगर दोनों टीमें हर बार नहीं मिलती हैं, तो ऐसा ही सही।”
  3. द्विपक्षीय प्रतिबंध: भारत और पाकिस्तान ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद से द्विपक्षीय रूप से खेलना बंद कर दिया है। हालांकि, भारत सरकार ने हाल ही में बहुपक्षीय आयोजनों को छूट देते हुए द्विपक्षीय खेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की नीति पेश की थी ताकि देश ओलंपिक चार्टर का पालन कर सके।

एथरटन ने निष्कर्ष निकाला कि दोनों देशों को जानबूझकर एक-दूसरे के साथ खेलने के लिए इसलिए ड्रॉ किया जा रहा है ताकि तनाव को भुनाया जा सके, जो अच्छी विज्ञापन आय के लिए महत्वपूर्ण भीड़ और दर्शकों की संख्या को आकर्षित करता है।

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