‘एनईपी मैकाले-युग की शिक्षा प्रणाली में भारतीय चिंतन का संचार करेगी,’ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान

Varanasi: Union Minister Dharmendra Pradhan and Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath during the 4th edition of the Kashi Tamil Sangamam, in Varanasi, Tuesday, Dec. 2, 2025. (PTI Photo)(PTI12_02_2025_000431B)

भोपाल, 8 दिसंबर (पीटीआई) — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उद्देश्य मैकाले-युग की शिक्षा प्रणाली में भारतीय दर्शन और भारतीय संस्कृति की आत्मा का समावेश करना है।

भोपाल में आयोजित “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन: चुनौतियाँ और संभावनाएँ” विषय पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ जोड़ा जाए, ताकि दुनिया के सामने देश की समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिल सके।

प्रधान ने मध्य प्रदेश को वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक शिक्षण का प्राचीन केंद्र बताया। कार्यशाला में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने विचार रखे।

प्रधान ने कहा, “एनईपी का उद्देश्य मैकाले-कालीन शिक्षा प्रणाली में भारतीय चिंतन और ethos का समावेश करना है।” उन्होंने कहा कि रोजगार उन्मुख और नवाचार आधारित शिक्षा को जन-आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश ने संस्कृति, आस्था और ज्ञान परंपराओं की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण, दार्शनिक स्पष्टता और आध्यात्मिकता भारतीय शिक्षा की नींव रही है। उन्होंने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई जैसी “नई पीढ़ी की कौशलों” को विस्तार देने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को कक्षा 12 तक स्कूल में बनाए रखना, अनुसंधान को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना, समुदाय की भागीदारी बढ़ाना और शिक्षा संस्थानों को समाज के प्रति और अधिक जवाबदेह बनाना जरूरी है।

बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध कराने में सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता बताते हुए प्रधान ने महंगे फूलों के गुलदस्तों की जगह स्वागत समारोहों में फलों की टोकरी देने का सुझाव भी दिया।

प्रधान ने कहा कि वेदकाल से उज्जैन समय-गणना का प्रमुख केंद्र रहा है। “अब समय है कि भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली को आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़कर विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाए, ताकि हमारी संस्कृति और ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिले।”

राज्यपाल पटेल ने एनईपी को एक “दूरदर्शी कार्ययोजना” बताया, जो भारत के भविष्य का मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को स्पष्ट दिशा, निश्चित लक्ष्यों और सामंजस्यपूर्ण कार्य-संस्कृति के साथ शैक्षणिक परिवर्तन का अग्रणी राज्य बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा, समग्र विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी चुनौतियों पर सामूहिक चर्चा और राज्य की परिस्थितियों से उपजी संभावनाएँ बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, “21वीं सदी के छात्रों को तैयार करने के लिए एआई आधारित कौशल, डिजिटल साक्षरता और आत्म-शिक्षा के नए आयामों को अपनाते हुए अलग सोच के साथ प्रयास करने होंगे। नीति का सफल क्रियान्वयन सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास है।”

गुजरात की “दूध संजीवनी” पहल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों में दूध उपलब्ध कराने से कुपोषण में कमी आई और उपस्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा को केवल शिक्षकों की जिम्मेदारी मान लेना उचित नहीं है; अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश एनईपी-2020 लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि राज्य ने इस नीति को केवल शिक्षा सुधारों से नहीं जोड़ा बल्कि कौशल विकास, नवाचार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से भी सम्बद्ध किया है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ कहने की परंपरा शुरू कर राज्य ने प्राचीन गुरुकुल आदर्श को आधुनिक प्रणाली से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास बनाने वाले महान व्यक्तित्वों का निर्माण महान गुरुओं के सान्निध्य में हुआ है। “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनईपी ने युवाओं के लिए अपनी क्षमताओं को विकसित करने और विस्तृत करने के विशाल आयाम खोले हैं।”

यादव ने बताया कि राज्य में 370 संदीपनि विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जो 21वीं सदी के कौशल, एनईपी के कार्यान्वयन और शैक्षणिक नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जहाँ गुरुकुल परंपरा की गरिमा और डिजिटल युग की दक्षता दोनों एक साथ मिलती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता महाविद्यालय भी शुरू किए गए हैं। राज्य में उच्च शिक्षा संस्थानों को महान व्यक्तियों के नाम पर रखा जा रहा है, जो गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एकीकृत विश्वविद्यालयों की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है, जहाँ सभी विषय एक ही परिसर में उपलब्ध होंगे। एनईपी-2020 की चुनौतियों और अवसरों पर यह कार्यशाला भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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