एपस्टीन पीड़ित चाहते हैं कि पूर्व प्रिंस एंड्रयू सांसदों के सामने गवाही दें, लेकिन ऐसा होना मुश्किल

King Charles III’s scandal-hit brother Andrew loses Prince title, to move out of Royal Lodge

लंदन, 3 फरवरी (एपी): पूर्व प्रिंस एंड्रयू की प्रतिष्ठा छह साल पहले तब बुरी तरह ध्वस्त हो गई थी, जब उन्होंने दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ अपने रिश्ते को लेकर बीबीसी को एक बेहद खराब साक्षात्कार दिया था। इसके बाद वे इंटरनेट पर मज़ाक का विषय बन गए थे।

अब, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य और एपस्टीन पीड़ितों की ओर से पैरवी कर रहीं वकील एंड्रयू से यह मांग कर रहे हैं कि वे जांचकर्ताओं को बताएं कि उन्हें एपस्टीन और उसके अमीर-ताकतवर नेटवर्क के बारे में क्या जानकारी है। लेकिन एंड्रयू के फिर से वैसा जोखिम उठाने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है।

रॉयल हॉलोवे, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में संवैधानिक कानून और राजशाही के विशेषज्ञ क्रेग प्रेस्कॉट ने कहा, “अगर 2019 के न्यूज़नाइट इंटरव्यू को उदाहरण माना जाए, तो यह कहना मुश्किल है कि एंड्रयू ऐसी बेहद कठोर पूछताछ में कैसे पेश आएंगे। वह पूछताछ एमिली मैटलिस के सवालों से भी कहीं ज्यादा कड़ी होगी। ऐसे में स्वेच्छा से गवाही देना एंड्रयू के हित में नहीं दिखता।”

अमेरिकी न्याय विभाग की जांच से जुड़े हाल में जारी दस्तावेजों में एंड्रयू और एपस्टीन के संबंधों को लेकर और भी आपत्तिजनक विवरण सामने आने के बाद, एंड्रयू पर गवाही देने का दबाव बढ़ गया है। एपस्टीन पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहीं वरिष्ठ वकील ग्लोरिया ऑलरेड ने सोमवार को कहा कि एंड्रयू पर यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे ऐसी कोई भी जानकारी साझा करें जिससे यह समझने में मदद मिले कि एपस्टीन इतने लंबे समय तक इतने सारे लोगों का शोषण कैसे करता रहा और इसमें कौन-कौन शामिल हो सकता है।

पिछली बार जवाब देना भारी पड़ा

2019 के इंटरव्यू के बाद एंड्रयू को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। एपस्टीन के 2008 में नाबालिग से वेश्यावृत्ति के अपराध में सजा पाने के बाद भी उससे संपर्क बनाए रखने के उनके तर्कों को अविश्वसनीय बताया गया और पीड़ितों के प्रति सहानुभूति की कमी के लिए उनकी आलोचना हुई।

पिछले साल, किंग चार्ल्स तृतीय ने शाही परिवार की छवि को बचाने के लिए एंड्रयू से उनके शाही ख़िताब छीन लिए, जिनमें “प्रिंस” कहलाने का अधिकार भी शामिल था। अब उन्हें औपचारिक रूप से एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर कहा जाता है। उन्हें विंडसर कासल के पास स्थित 30 कमरों वाले रॉयल लॉज को भी खाली करने का आदेश दिया गया है।

गवाही देने के लिए मजबूर करना मुश्किल

लंदन की लॉ फर्म हॉवर्ड केनेडी के वकील मार्क स्टीफेंस के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों के लिए एंड्रयू को कांग्रेस के सामने पेश होने के लिए बाध्य करना बेहद कठिन होगा। उन्होंने कहा, “उन पर भारी दबाव होगा, लेकिन अगर वे पेश भी हो जाएं, तो भी उनसे कोई ठोस जानकारी निकलने की उम्मीद कम है। संभव है कि वे आत्म-अभियोग से बचने का अधिकार यानी ‘फिफ्थ’ का सहारा लें।”

शुक्रवार को जारी दस्तावेजों से संकेत मिला कि एपस्टीन ने माउंटबेटन-विंडसर और एक “सुंदर” 26 वर्षीय रूसी महिला के बीच मुलाकात कराने की कोशिश की थी और एंड्रयू ने एपस्टीन को बकिंघम पैलेस में डिनर का न्योता दिया था। दस्तावेजों में एंड्रयू की पूर्व पत्नी सारा फर्ग्यूसन के ईमेल भी शामिल हैं, जिनमें उन्होंने एपस्टीन को “लीजेंड” और “वह भाई जिसकी मुझे हमेशा चाह थी” कहा। हालांकि, इन दस्तावेजों में नाम आने मात्र से कई लोगों के खिलाफ किसी अपराध का प्रमाण नहीं मिलता।

अमेरिकी अधिकारियों से दूरी

एंड्रयू पहले भी अमेरिकी जांचकर्ताओं से दूरी बनाए रख चुके हैं। 2019 में शाही कर्तव्यों से हटने के बाद उन्होंने कहा था कि वे “किसी भी उपयुक्त कानून प्रवर्तन एजेंसी” की मदद को तैयार हैं। लेकिन बाद में सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि उनके वकीलों और अमेरिकी अभियोजकों के बीच करीब 10 महीने तक चली बातचीत के बावजूद उनकी सीधी गवाही नहीं हो सकी।

अभियोजकों ने उनसे व्यक्तिगत रूप से या वीडियो के जरिए पूछताछ की मांग की थी, लेकिन उनके वकीलों ने इसे ठुकराते हुए लिखित जवाब देने का प्रस्ताव रखा। अंततः सितंबर 2020 में अमेरिकी अभियोजकों ने ब्रिटिश अदालतों के जरिए औपचारिक प्रक्रिया अपनाने की बात कही, लेकिन ऐसा कोई साक्षात्कार हुआ हो, इसके संकेत नहीं मिले।

ग्लोरिया ऑलरेड का कहना है कि एंड्रयू की गवाही पीड़ितों के लिए बेहद अहम है। उन्होंने बीबीसी से कहा, “यह तय करना एंड्रयू का काम नहीं है कि उनके पास मददगार जानकारी है या नहीं। अभी भी देर नहीं हुई है, और उनके पास ऐसी जानकारी है जो जांच में मदद कर सकती है।” (एपी)

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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