एमएलसी पद से इस्तीफे के साथ बिहार के मुख्यमंत्री पद से Nitish Kumar के बाहर होने की उलटी गिनती शुरू

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar, state Deputy CM Samrat Choudhary and BJP National President Nitin Nabin during the 'Shobha Yatra' marking the ‘Ram Navami’ festival celebrations, in Patna, Friday, March 27, 2026. (PTI Photo) (PTI03_27_2026_000352B)

पटना, 30 मार्च (PTI): बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के साथ ही उनके मुख्यमंत्री पद से हटने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अब यह चर्चा जोरों पर है कि जद(यू) अध्यक्ष के पद छोड़ने के बाद नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।

1 मार्च को 75 वर्ष के हुए कुमार ने एक सप्ताह बाद राज्यसभा में जाने का फैसला घोषित कर सबको चौंका दिया था। इससे संकेत मिला कि विधानसभा चुनाव में नया जनादेश मिलने के महज चार महीने बाद ही वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहते हैं।

उनके करीबी सहयोगी कुछ समय से उस संवैधानिक प्रावधान का जिक्र कर रहे थे, जिसके तहत कोई व्यक्ति राज्य विधानसभा का सदस्य न रहने के बाद भी छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है।

वरिष्ठ मंत्री Shravan Kumar जैसे नेताओं के ऐसे बयानों से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि जद(यू), जिसके पास भाजपा से केवल चार विधायक कम हैं, अपने सहयोगी दल को सरकार बनाने देने से पहले सख्त सौदेबाजी कर सकता है।

हालांकि एनडीए सूत्रों का मानना है कि कुमार, जो अगले महीने की शुरुआत में राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं, इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने नहीं रहेंगे। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन “खरमास” के बाद ही संभव है, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल को समाप्त होता है।

भाजपा खेमे में अपने “मुख्यमंत्री” को देखने की संभावना को लेकर उत्साह है, क्योंकि हिंदी पट्टी के इस राज्य में करीब दो दशकों से सत्ता में साझेदार रहने के बावजूद पार्टी को अब तक यह पद नहीं मिला है।

संभावित उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, जिनके पास गृह विभाग भी है।

चौधरी कोइरी समुदाय से आते हैं, जो एक प्रभावशाली ओबीसी वर्ग है। इस वर्ग का समर्थन हासिल कर भाजपा लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठा सकती है और “सिर्फ सवर्णों की पार्टी” वाली छवि को भी तोड़ सकती है।

हालांकि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि चौधरी को संघ का पूरा समर्थन नहीं मिल सकता, क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का बड़ा हिस्सा राजद और जद(यू) में बिताया है और 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे।

एक अन्य प्रमुख नाम Nityanand Rai का भी सामने आ रहा है, जिन्हें केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah का करीबी माना जाता है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि नया मुख्यमंत्री विधायकों की बैठक में घोषित किया जाएगा, लेकिन अंतिम फैसला दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर राजस्थान का जिक्र किया जा रहा है, जहां एक पहली बार विधायक को मुख्यमंत्री बनाया गया था।

इस बीच जद(यू) सूत्रों का कहना है कि वे नई सरकार में “उचित हिस्सेदारी” की मांग करेंगे और नीतीश कुमार के पुत्र Nishant Kumar को उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।