दुबई (संयुक्त अरब अमीरात), 29 अक्टूबर (AP) एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बुधवार को कहा कि यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित एक जेल पर अप्रैल में किए गए अमेरिकी हवाई हमले की जांच संभावित युद्ध अपराध के रूप में की जानी चाहिए, क्योंकि इस हमले में 60 से अधिक अफ्रीकी प्रवासियों की मौत हुई थी। यह हमला 28 अप्रैल को सादा प्रांत में हुआ था और यह संघर्ष के दौरान रेड सी में जहाज़ों की आवाजाही में बाधा डालने वाले हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में चलाए गए सघन हवाई अभियानों का हिस्सा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभी तक इस हमले पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है, जबकि यह जेल पहले भी सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा निशाना बनाई जा चुकी है और यहाँ अफ्रीकी प्रवासियों को हिरासत में रखा जाता था जो सऊदी अरब पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिकी नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने कहा कि वे नागरिकों को नुकसान पहुंचने वाली हर रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हैं और ऑपरेशन ‘रफ राइडर’ की जांच रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी।
एमनेस्टी का कहना है कि हमले के बाद मिले मलबे में ऐसे दो GBU-39 छोटे और सटीक-निर्देशित बमों के अवशेष पाए गए जिन्हें अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है। इस हमले में घायल बचे लोगों, जो सभी इथियोपियाई प्रवासी थे, ने बताया कि इमारत के अंदर कोई हूती लड़ाके नहीं थे। एमनेस्टी के अनुसार यह हमला अंधाधुंध प्रतीत होता है क्योंकि वहाँ कोई स्पष्ट सैन्य लक्ष्य नहीं दिखा। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अस्पतालों और जेलों जैसे स्थानों पर हमला तब तक प्रतिबंधित है जब तक उनका इस्तेमाल युद्ध से जुड़े कार्यों के लिए न किया जा रहा हो और फिर भी नागरिकों को बचाने के पूरे प्रयास किए जाने चाहिए। हूती प्रशासन ने मरने वालों की संख्या 61 बताते हुए पहले जारी आंकड़े 68 से कम किए हैं।
इससे पहले 2022 में भी इसी परिसर पर सऊदी गठबंधन ने हमला किया था जिसमें 66 बंदियों की मौत हो गई थी और 113 घायल हुए थे। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार उस समय भागने की कोशिश कर रहे कम से कम 16 कैदियों को हूती लड़ाकों ने गोली मार दी थी। इस बार हूती विद्रोहियों ने किसी गलत कार्रवाई से इनकार किया है, हालांकि एमनेस्टी ने कहा कि उनके शासन द्वारा पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के कारण जांच करना मुश्किल रहा।
अमेरिका के हमले पहले बाइडेन प्रशासन में शुरू हुए थे, लेकिन ट्रंप के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन रफ राइडर’ के दौरान अचानक बहुत तेजी से बढ़े और यमन में करीब 1,000 स्थलों पर हमले किए गए। इन हमलों में बिजली स्टेशनों, मोबाइल फोन ढांचे और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इसमें बड़ी संख्या में नागरिक भी मारे गए। ब्रिटेन स्थित संस्था ‘एयरवॉर्स’ का अनुमान है कि इस अभियान के दौरान कम से कम 224 नागरिकों की मौत हुई, जो पिछले 20 वर्षों में अमेरिका द्वारा यमन में किए गए हमलों में मारे गए लोगों के लगभग बराबर है।
एमनेस्टी की अधिकारी क्रिस्टीन बेकर्ली ने कहा कि यह सोचना मुश्किल है कि अमेरिका फिर उसी परिसर पर हमला करता जहाँ पहले भी इतने नागरिक मारे गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इथियोपिया से अपने परिवारों की मदद करने के लिए रोजगार की उम्मीद में निकले ये प्रवासी युद्धग्रस्त यमन में ही घायल और फंस गए हैं और अब उल्टा अपने परिवारों पर बोझ बन गए हैं। (AP) RD RD
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