भोपाल, 20 फरवरी (पीटीआई)। मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के लिए असंसदीय शब्द का इस्तेमाल कर विवाद खड़ा कर दिया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खेद व्यक्त किया।
गुरुवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री विजयवर्गीय अपना आपा खो बैठे, जिससे सदन में हंगामा मच गया।
चर्चा में भाग लेते हुए सिंघार ने सिंगरौली में सरकार और अडाणी समूह के बीच हुए एक समझौते का हवाला दिया और दावा किया कि सरकार बिजली खरीद के नाम पर 25 वर्षों में कंपनी को 1.25 लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी कर रही है।
मंत्री विश्वास सारंग ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में उपस्थित नहीं किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया जाना चाहिए, जबकि विजयवर्गीय ने सिंघार पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।
सिंघार ने पलटवार करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर वह प्रमाण देने को तैयार हैं। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप हुआ, इसी दौरान विजयवर्गीय ने असंसदीय शब्द का इस्तेमाल कर दिया।
इसके बाद विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की और हंगामे के बीच अध्यक्ष तोमर ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर तोमर ने “असहज स्थिति” पर खेद जताया।
पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा का उल्लेख करते हुए तोमर ने कहा कि वे अक्सर कहते थे कि सदन में बोलते समय गुस्सा दिखना चाहिए, लेकिन वह झलकना नहीं चाहिए।
तोमर ने कहा, “गुस्सा नहीं आना चाहिए था, लेकिन आज दोनों तरफ से आया। इससे असहज स्थिति बनी। मुझे इसका दुख है और इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जिम्मेदार हैं। संसदीय कार्य मंत्री बहुत अनुभवी हैं, फिर भी आज मर्यादा कैसे लांघी गई, यह हम सबके लिए चिंता का विषय है।” उन्होंने दोनों पक्षों से विवाद सुलझाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जो शब्द कहे गए, चाहे जानबूझकर या अनजाने में, उसके लिए वे सदन से क्षमा मांगते हैं।
सिंघार ने कहा कि वे मुख्यमंत्री की भावना का सम्मान करते हैं और संसदीय मर्यादा का भी सम्मान करते हैं। “यदि मेरी ओर से भी कुछ हुआ हो तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं,” उन्होंने कहा।
विजयवर्गीय ने भी कहा कि उनके पास 37 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन वे अपने व्यवहार से दुखी हैं। उन्होंने कहा, “अगर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग संसदीय मर्यादा का पालन नहीं करेंगे तो अन्य सदस्य कैसे करेंगे? मुझे नहीं पता आज यह सब कैसे हो गया। उमंग की बॉडी लैंग्वेज थोड़ी अलग थी… मैं उमंग से प्यार करता हूं… मुझे अपने व्यवहार पर दुख है।”
बाद में सिंघार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि वे हमेशा अपनी मर्यादा में रहते हैं।
उन्होंने लिखा, “मेरा कद यह है कि मैं मध्य प्रदेश के 7.5 करोड़ लोगों के सवाल आपकी अहंकारी सरकार के सामने मजबूती से उठाता हूं। यही मेरा कद आपको इतना छोटा कर गया कि आपका असली चेहरा सामने आ गया; यही मेरा कद आपको भागीरथपुरा पर बहस करने को मजबूर कर गया।”
उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय द्वारा इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा मध्य प्रदेश की जनता का अपमान है।
“मंत्री विजयवर्गीय, जो जनता को कीड़े-मकोड़े समझते हैं, उन्होंने अपने अहंकार का प्रदर्शन किया है। 35 परिवार उजड़ गए, लोग बेघर हो गए — और जब आप सवाल पूछते हैं तो कहा जाता है, ‘अपनी औकात में रहो!’,” सिंघार ने कहा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जनप्रतिनिधि सत्ता के नशे में इतने चूर हो गए हैं कि खुद को जनता से ऊपर समझने लगे हैं।
“जिन लोगों को आप उनकी जगह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वही लोग चुनाव के दिन आपकी असली जगह दिखाएंगे। मध्य प्रदेश अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा। जनता जानती है कि अहंकार और असंवेदनशीलता से चलने वाली अक्षम सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से कैसे जवाब देना है,” सिंघार ने कहा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विजयवर्गीय के व्यवहार को अहंकार की पराकाष्ठा बताया और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ का नया स्वरूप है।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस विजयवर्गीय के पुतले जलाकर विरोध करेगी। उनकी घोषणा के कुछ ही देर बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल स्थित उनके आवास के बाहर विजयवर्गीय का पोस्टर जलाया।
हाल ही में विजयवर्गीय ने इंदौर में पेयजल प्रदूषण से जुड़े एक सवाल पर एक पत्रकार को जवाब देते हुए “घंटा” शब्द का इस्तेमाल किया था, जो आमतौर पर “बकवास” या “निरर्थक” के अर्थ में बोला जाता है, जिससे विवाद खड़ा हो गया था।
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