एमबीबीएस छात्र की दाखिला रद्द करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, हाईकोर्ट जाने को कहा

नई दिल्ली, 8 जुलाई (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा के एक मेडिकल कॉलेज में बिना पूर्व सूचना के दाखिला रद्द किए जाने के खिलाफ एक एमबीबीएस छात्र की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और आर. महादेवन की आंशिक कार्यदिवस वाली पीठ ने छात्र के वकील हर्षित अग्रवाल से कहा कि वे अपनी शिकायत लेकर हाईकोर्ट जाएं।

पीठ ने कहा, “याचिका को वापस लिया गया मानकर खारिज किया जाता है।”

अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में 2024-2029 शैक्षणिक सत्र के लिए एमबीबीएस कोर्स में फिर से दाखिले की मांग की थी।

उन्होंने यह भी मांग की थी कि बिना किसी नोटिस या सुनवाई के उनका दाखिला रद्द किया जाना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ घोषित किया जाए।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि मेडिकल कॉलेजों में अनुशासनात्मक मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए समान प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय बनाए और लागू किए जाएं।

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि अग्रवाल ने हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया और सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए।

वकील ने बताया कि इससे पहले एक अन्य एमबीबीएस छात्र के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह की याचिका पर नोटिस जारी किया था, और एक संबंधित ट्रांसफर याचिका भी लंबित है, जिसकी सुनवाई 14 जुलाई को होनी है।

न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा, “हम यहां सीधे रिट याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे।” इसके बाद वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे मंजूरी दे दी गई।

केंद्र के अलावा, अग्रवाल ने अपनी याचिका में नेशनल मेडिकल कमीशन, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, सीबीआई और ओडिशा के भीमा भोई मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को भी पक्षकार बनाया था।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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