एयर प्यूरीफायर्स को मेडिकल डिवाइस के रूप में वर्गीकृत करने की याचिका में कोई वास्तविक सार्वजनिक हित नहीं: केंद्र ने दिल्ली HC में कहा

New Delhi: Security personnel keep vigil during a demonstration against the suspension of the jail term of Kuldeep Sengar, a former BJP MLA who was convicted in the Unnao rape case, outside the Delhi High Court, in New Delhi, Friday, Dec. 26, 2025. (PTI Photo/Salman Ali)(PTI12_26_2025_000108B)

नई दिल्ली, 9 जनवरी (PTI) – केंद्र ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि एयर प्यूरीफायर्स को “मेडिकल डिवाइस” के रूप में वर्गीकृत करने के लिए दायर याचिका इस बात को रेखांकित करती है कि यह याचिका किसी वास्तविक सार्वजनिक हित के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि यह एक “रंगीन” और “प्रेरित” प्रयास है।

केंद्रीय सरकार के वकील ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष कहा कि एयर प्यूरीफायर्स को मेडिकल डिवाइस के रूप में वर्गीकृत करना PIL के कथित उद्देश्य के विपरीत होगा, क्योंकि इससे इन पर अतिरिक्त नियामक पालन नियम लागू होंगे और पहले से ही सीमित आपूर्ति वाले बाजार में उनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

न्यायालय ने नोट किया कि केंद्र के हलफनामे में याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ दावे किए गए हैं और उसे अपनी जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

केंद्रीय और GST काउंसिल का प्रतिनिधित्व करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटारमण ने कहा कि एयर प्यूरीफायर्स को “मेडिकल डिवाइस” घोषित करने और उनकी GST दर घटाने की मांग करने वाली PIL पर न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से असंगत है।

केंद्र ने कहा कि यह याचिका “रंगीन” और “प्रेरित” प्रयास है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक हित के बहाने नियामक पुनर्वर्गीकरण प्राप्त करना है।

केंद्र ने हलफनामे में कहा, “याचिकाकर्ता की मांग और एयर प्यूरीफायर्स को ‘मेडिकल डिवाइस’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने पर जोर इस बात को दर्शाता है कि यह याचिका किसी वास्तविक सार्वजनिक हित को पूरा करने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि सार्वजनिक हित अधिकार क्षेत्र का रंगीन और प्रेरित प्रयोग है।”

हलफनामे में कहा गया कि इस याचिका का उद्देश्य एयर प्यूरीफायर्स को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और मेडिकल डिवाइस रूल्स के तहत नियामक वर्गीकरण दिलाना है, जिससे केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ मिलेगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा सीमित होगी। इसलिए याचिका केवल इसी आधार पर खारिज की जानी चाहिए।

इस याचिका में वकील कपिल मदन ने कहा था कि दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण की “अत्यंत आपातकालीन स्थिति” के मद्देनजर एयर प्यूरीफायर्स को लक्ज़री आइटम नहीं माना जा सकता।

न्यायालय ने पहले केंद्र से पूछा था कि खराब होती वायु गुणवत्ता के मद्देनजर एयर प्यूरीफायर्स पर GST दर क्यों नहीं कम की जा सकती। कोर्ट ने GST काउंसिल को शीघ्र बैठक करने और टैक्स घटाने या हटाने पर विचार करने के लिए निर्देश भी दिए थे।

केंद्र ने हलफनामे में कहा कि न्यायालय द्वारा GST दरों को बदलने या GST काउंसिल को किसी विशेष परिणाम पर विचार करने का निर्देश देना संवैधानिक रूप से असंगत होगा और संघीय ढांचे के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।

वर्तमान में एयर प्यूरीफायर्स पर 18% GST है, जबकि मेडिकल डिवाइस पर 5% GST लगाया जाता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि एयर प्यूरीफायर्स पर भी 5% GST लगाया जाना चाहिए।

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