
नई दिल्ली, 13 फरवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 30 अप्रैल की समयसीमा बढ़ाकर 31 मई कर दी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार के प्रधान सचिव द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए पुनर्निर्माण कार्य, परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने की उच्च न्यायालय की 28 फरवरी की समयसीमा भी बढ़ाकर 31 मार्च कर दी।
9 जनवरी को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव छह महीने टालने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी और 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
शीर्ष अदालत ने समयसीमा एक माह बढ़ाते हुए कहा कि उच्च न्यायालय का यह कहना सही था कि परिसीमन कार्य लंबित होना ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव “टालने और रोकने” का आधार नहीं बन सकता।
हालांकि पीठ ने कहा कि पहाड़ी राज्य में मानसून और उससे उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया 31 मई से पहले पूरी कर ली जानी चाहिए।
उच्च न्यायालय ने चुनाव स्थगन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी करने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि राज्य में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों तथा सड़कों को व्यापक नुकसान हुआ है, इसलिए स्थिति सामान्य होने तक चुनाव प्रक्रिया स्थगित रखी जाए।
सरकार ने यह भी कहा था कि राज्य में आपदा अधिनियम लागू है।
हालांकि उच्च न्यायालय ने लगातार तीन दिनों तक दलीलें सुनने के बाद सरकार को 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने का निर्देश दिया था। पीटीआई एसजेके एमएनआर एसजेके डीवी डीवी
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