ऑपरेशन सिंदूर की राष्ट्रपति ने की सराहना, कहा— इससे सशस्त्र बलों का साहस और शौर्य दुनिया ने देखा

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: President Droupadi Murmu being accorded a Guard of Honour upon her arrival at Parliament House complex to address the joint sitting of both Houses on the first day of the Budget session, in New Delhi, Wednesday, Jan. 28, 2026. Vice President C.P. Radhakrishnan, Prime Minister Narendra Modi and Lok Sabha Speaker Om Birla are also seen. (Sansad TV via PTI Photo)(PTI01_28_2026_000109B)

नई दिल्ली, 28 जनवरी (PTI): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पूरी दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों का शौर्य और साहस देखा, जब उन्होंने अपने ही संसाधनों के बल पर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आतंकी कृत्य का जवाब निर्णायक कार्रवाई से दिया जाएगा।

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए, बजट सत्र की शुरुआत के अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा, “भारत ने यह सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों का पराक्रम और साहस देखा है।”

उन्होंने कहा कि देश ने अपने ही संसाधनों के बल पर आतंकी शिविरों को नष्ट किया और सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी आतंकी हमले का दृढ़ और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। राष्ट्रपति के इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सत्तापक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन भी आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ पर काम किया जा रहा है और सुरक्षा बलों ने माओवादी आतंक के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय रक्षा प्लेटफॉर्म पर भरोसा और मजबूत हुआ है, ऐसा उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार देश में सामाजिक न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को और सशक्त करने के लिए काम किया जा रहा है और अब करीब 95 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। “मेरी सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है,” उन्होंने कहा और जोड़ा कि पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों पर अंकुश लगाने तथा सार्वजनिक धन के सही उपयोग में सफल रही है। उन्होंने कहा कि इस सदी के पहले 25 वर्षों का समापन भारत के लिए कई उपलब्धियों, गौरवपूर्ण क्षणों और असाधारण अनुभवों से भरा रहा है तथा पिछले 10–11 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में अपनी नींव को मजबूत किया है।

नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के आयोजन और महान आदिवासी नेता व स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर देश की ओर से दी गई श्रद्धांजलि का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब देश अपने पूर्वजों के योगदान को याद करता है, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और विकसित भारत की ओर यात्रा और तेज होती है।

उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने वाला बताया और कहा कि भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती समारोहों ने पूरे देश को संगीत और एकता के भाव से भर दिया।

राष्ट्रपति के भाषण के दौरान विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी रैम जी योजना के उल्लेख पर विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह योजना 125 दिनों के काम की गारंटी देगी, भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकेगी तथा ग्रामीण विकास को नई गति देगी।

जहां सत्तापक्ष के सदस्य इस योजना के समर्थन में मेज थपथपाते रहे, वहीं विपक्षी सांसदों ने इसे वापस लेने की मांग करते हुए नारे लगाए। “वापस लो” के नारों के बीच राष्ट्रपति को अपने भाषण में कुछ देर के लिए रुकना पड़ा।

विपक्षी दल वीबी-जी रैम जी अधिनियम को वापस लेने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें काम का अधिकार और पंचायतों की भूमिका शामिल है। सरकार का दावा है कि नया अधिनियम ग्रामीण रोजगार की गारंटी को और मजबूत करेगा। PTI

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