कड़ाके की ठंड के बीच दिल्ली की एनजीओ ने कमजोर वर्गों के लिए बचाव और चिकित्सा सहायता तेज की

New Delhi: A man covers himself with a blanket on a cold winter morning, in New Delhi, Thursday, Jan. 1, 2026. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI01_01_2026_000017B)

नई दिल्ली, 4 जनवरी (पीटीआई) — राजधानी में कड़ाके की ठंड जारी रहने के बीच देर रात बचाव अभियानों से लेकर बेघरों को स्लीपिंग बैग बांटने और जोड़ों के दर्द से जूझ रहे बुजुर्गों को चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराने तक, दिल्ली की गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) ने कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयास तेज कर दिए हैं।

दिल्ली की कई एनजीओ चौबीसों घंटे खुले में सो रहे लोगों को बचाने के लिए काम कर रही हैं। वे सरकारी रेस्क्यू वैन के साथ समन्वय कर उन्हें आश्रयों तक पहुंचाने, गर्म कपड़े उपलब्ध कराने और चिकित्सकीय सहायता देने में जुटी हैं।

सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (सीएचडी) के अनुसार, इस सर्दी के मौसम में अब तक 2,000 से अधिक बेघर लोगों को बचाया जा चुका है।

सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनील कुमार अडेलिया ने कहा, “हम अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों को बचा चुके हैं, स्लीपिंग बैग वितरित किए हैं और सरकारी वैन के साथ मिलकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। हम मौजूदा आश्रयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं और ऐसे परित्यक्त भवनों की पहचान भी कर रहे हैं, जहां लोगों को अस्थायी रूप से ठहराया जा सके।”

बचाव और आश्रय के साथ-साथ, एनजीओ ने स्वास्थ्य से जुड़े हस्तक्षेप भी बढ़ा दिए हैं, खासकर बुजुर्गों के लिए, जिन्हें सर्दियों में जोड़ों के दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत बढ़ जाती है।

दिल्ली की एनजीओ सेवा भवन ने बताया कि वह सड़कों पर रहने वाले और अस्थायी आश्रयों में रह रहे वरिष्ठ नागरिकों को फिजियोथेरेपी सहायता और दवाइयां उपलब्ध करा रही है।

संस्था के स्वयंसेवक मोहित ने कहा, “सर्दियों में बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है क्योंकि ठंड से जोड़ों का दर्द और अकड़न बढ़ जाती है। सेवा भवन में हम गठिया और चलने-फिरने की समस्याओं से जूझ रहे बुजुर्गों को बुनियादी फिजियोथेरेपी सहायता और दवाइयां दे रहे हैं। कई लोग दर्द के कारण न तो ठीक से चल पाते हैं और न ही सो पाते हैं। ऐसे में समय पर चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी है।”

एक अन्य दिल्ली स्थित एनजीओ ‘विशेज एंड ब्लेसिंग्स’ ने अपनी वार्षिक शीतकालीन राहत पहल ‘6 वीक्स ऑफ वॉर्म्थ’ शुरू की है, जिसका उद्देश्य शहर भर में कमजोर वर्गों को लगातार सहायता प्रदान करना है।

15 दिसंबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम का फोकस बेघर लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, बुजुर्गों और असुरक्षित हालात में रह रहे परिवारों पर है।

इस पहल के तहत स्वयंसेवक दिल्ली के विभिन्न इलाकों में, खासकर रात के समय जब तापमान तेजी से गिरता है, कंबल, शॉल, स्वेटर, टोपी, मोजे और अन्य सर्दी के जरूरी सामान बांट रहे हैं।

‘विशेज एंड ब्लेसिंग्स’ की संस्थापक और अध्यक्ष गीतांजलि चोपड़ा ने कहा, “जिन लोगों के पास पर्याप्त आश्रय या गर्म कपड़े नहीं हैं, उनके लिए सर्दियां जानलेवा साबित हो सकती हैं। इस कार्यक्रम के जरिए हमारा उद्देश्य सर्दी के सबसे कठिन हफ्तों में तत्काल राहत पहुंचाना और लोगों की जान बचाना है।”

अन्य संगठनों ने भी फुटपाथों, फ्लाईओवरों और निर्माण स्थलों जैसे संवेदनशील इलाकों में अपनी पहुंच बढ़ा दी है।

दिल्ली स्थित राहगीरी फाउंडेशन ने बताया कि उसने खुले में सो रहे लोगों की पहचान करने और उन्हें आश्रयों में जाने के लिए प्रेरित करने के लिए रात की गश्त तेज कर दी है।

राहगीरी फाउंडेशन के समन्वयक अनिल कुमार ने कहा, “हमारे स्वयंसेवक हर रात outreach करते हैं, गर्म भोजन और कंबल देते हैं और लोगों को आश्रयों में जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। लगातार संवाद से उन लोगों का भरोसा जीतने में मदद मिलती है, जो आश्रयों में जाने से हिचकते हैं।”

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, रविवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक है।

आईएमडी ने कहा कि 6 जनवरी तक शहर के कुछ इलाकों में शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है।

शीतलहर तब घोषित की जाती है, जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाए।