
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (PTI): मध्य प्रदेश में “दूषित” कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के बाद एक शिशु रोग विशेषज्ञ की गिरफ्तारी को देखते हुए, भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के हस्तक्षेप और उस ईमानदार डॉक्टर के खिलाफ दर्ज मामले की तत्काल वापसी की मांग की।
IMA ने पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर (RMP) के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि इस त्रासदी की असली वजह निर्माता स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण की विफलता और निगरानी के लिए जिम्मेदार नियामक तंत्र की असफलता है।
संघ ने कहा, “मिलावटी दवा को बाजार में लाने की प्राथमिक कानूनी जिम्मेदारी और दोष निर्माता और प्रवर्तन एजेंसियों पर है। हम मंत्रालय से अनुरोध करते हैं कि डॉक्टर को एक प्रणालीगत विफलता का द्वितीयक पीड़ित माना जाए और उनके खिलाफ सभी कानूनी कार्यवाही को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया जाए।”
IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली ने 8 अक्टूबर को नड्डा को लिखे पत्र में कहा कि डॉक्टर की गिरफ्तारी “कानूनी निरक्षरता” का उदाहरण है और इससे पूरे देश के स्वास्थ्य कर्मियों के बीच नकारात्मक संदेश गया है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने डॉक्टरों की गिरफ्तारी से पहले पालन किए जाने वाले उचित प्रक्रिया का उल्लेख किया है, जो इस मामले में अनुपस्थित है।
पत्र में कहा गया, “डॉक्टर दवा को सद्भावना में लिखता है, जो नियामक निकायों द्वारा स्वीकृत और प्रमाणित आपूर्ति श्रृंखला में उपलब्ध होती है। वे निर्माण में होने वाली गुप्त त्रुटियों का पता लगाने के लिए सक्षम नहीं हैं।”
IMA ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से डॉक्टरों में डर पैदा होगा और वे सस्ती जेनेरिक दवाएं लिखने से हिचकिचाएंगे, जिससे अंततः मरीजों को नुकसान होगा।
IMA ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पांच सुधार प्रस्तावित किए हैं — नियामक जनशक्ति और ढांचे को मजबूत करना, संदूषक परीक्षण अनिवार्य करना, मजबूत दवा रिकॉल नीति, फार्माकोविजिलेंस सुदृढ़ करना और जोखिम आधारित निरीक्षण व लाइसेंस ऑडिट।
IMA ने कहा, “हम स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील करते हैं कि मामले की जांच डॉक्टर के बजाय निर्माता और नियामक एजेंसियों पर केंद्रित की जाए। एक मजबूत और विश्वसनीय नियामक प्रणाली ही सुरक्षित स्वास्थ्य देखभाल की नींव है।”
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि पांच बच्चे गंभीर स्थिति में हैं, जबकि 20 की मौत “विषाक्त” कोल्डरिफ कफ सिरप पीने से हुई है।
राज्य सरकार ने सोमवार को दो औषधि निरीक्षकों और एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया तथा राज्य औषधि नियंत्रक का तबादला किया।
छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी को “लापरवाही” के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
SEO टैग्स: #स्वदेशी #समाचार #कफसिरपमौत #IMA #JPनड्डा #डॉक्टरगिरफ्तारी #स्वास्थ्य
