
नई दिल्ली, 5 जुलाई (PTI) — दिल्ली के करोल बाग इलाके में स्थित विशाल मेगा मार्ट में शुक्रवार शाम लगी आग में दो व्यक्तियों की मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को इसकी पुष्टि की।
मृतकों में एक की पहचान कुमार धीरेंद्र प्रताप (25) के रूप में हुई है, जो लिफ्ट के अंदर मृत पाए गए। पुलिस को संदेह है कि आग लगने के बाद वह लिफ्ट में फंस गए थे और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
बाद में शीतलन (कूलिंग) प्रक्रिया के दौरान एक और जली हुई पुरुष की लाश इमारत से बरामद हुई, जिसकी पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस ने बताया कि उसकी पहचान सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम इमारत के अंदर और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं ताकि मृतक की पहचान की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि आग से पहले कोई संदिग्ध गतिविधि हुई थी या नहीं।”
पुलिस और दमकल विभाग के अनुसार, आग लगने की सूचना शुक्रवार शाम 6:44 बजे चार मंजिला व्यावसायिक इमारत की दूसरी मंजिल से मिली, जो पदम सिंह रोड पर स्थित है।
पुलिस और चश्मदीदों ने बताया कि आग लगने के समय इमारत में करीब 50 लोग मौजूद थे। एक सुरक्षा गार्ड ने धुआं देखा और तुरंत अलार्म बजाया और सभी को बाहर निकलने को कहा।
घटना के समय मौजूद अभिषेक (32) ने बताया, “बहुत अफरा-तफरी मच गई थी। गार्ड चिल्ला रहा था, ‘भागो भागो, आग लग गई है।’ लोग सीढ़ियों से बाहर निकलने लगे और कुछ लोग इमरजेंसी दरवाजे से भी निकल गए।”
हालांकि, धीरेंद्र लिफ्ट में चले गए और वहीं फंस गए। अपने अंतिम क्षणों में उन्होंने अपने बड़े भाई को घबराहट में मैसेज भेजे। शाम 6:51 बजे उन्होंने लिखा, “भैया… हम लिफ्ट में हैं। गैस (गलत वर्तनी में) गए हैं। करोल बाग मेगा मार्ट।” उनका आखिरी संदेश था, “अब सांस फूल रहा। कुछ करो।” इसके बाद कोई संदेश नहीं आया।
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग मुख्य रूप से दूसरी मंजिल पर लगी थी, जहां भारी मात्रा में ज्वलनशील सामान रखा था।
एक अधिकारी ने बताया, “कपड़ों और पैकिंग मटीरियल की भारी मात्रा के कारण आग तेजी से फैली। धुआं पूरे परिसर में भर गया, जिससे बचाव कार्य और मुश्किल हो गया।”
आग बुझाने के लिए 13 दमकल गाड़ियां और करीब 90 फायरफाइटर्स तैनात किए गए। घंटों चले ऑपरेशन के बाद भी शनिवार सुबह तक शीतलन कार्य जारी था।
अधिकारियों ने बताया कि इमारत के अंदर अपर्याप्त वेंटिलेशन के कारण धुआं काफी देर तक बना रहा और आग बुझाने के प्रयासों में बाधा आई।
हालांकि आग के सटीक कारण की पुष्टि नहीं हुई है, प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना गया है।
दिल्ली फायर सर्विस और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम ने साक्ष्य जुटाने के लिए मौके का दौरा किया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रारंभिक निरीक्षण में एक इलेक्ट्रिक पैनल के पास जलने के निशान मिले हैं, लेकिन हम विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।”
पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की संबंधित धाराओं के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय फायर एक्ज़िट, अग्निशमन यंत्र और अलार्म जैसे सुरक्षा उपाय कार्यरत थे या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों द्वारा मॉल प्रबंधन और इमारत के मालिक से भी पूछताछ की जा सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फायर सेफ्टी संबंधी जरूरी अनुमतियां और सर्टिफिकेट अपडेट थे या नहीं।
जैसे ही आग और मौतों की खबर फैली, आसपास के बाजारों के दुकानदार और स्थानीय निवासी इमारत के बाहर एकत्र होने लगे।
एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “यह बेहद चौंकाने वाली घटना है। यह इलाका बहुत संकरा है और दमकल की गाड़ियों को अंदर तक पहुंचने में काफी दिक्कत हुई। अगर और लोग फंसे होते, तो हालात और गंभीर हो सकते थे।”
इस बीच धीरेंद्र प्रताप के परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी धीरेंद्र दिल्ली में रिश्तेदारों के साथ रह रहा था और विशाल मेगा मार्ट में काम करता था। उनके भाई को जब संदेश मिले तो वे तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि मॉल के अंदर, आसपास की दुकानों और ट्रैफिक चौराहों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है—ना केवल वहां मौजूद लोगों की पहचान के लिए, बल्कि यह जांचने के लिए भी कि कहीं कोई आपराधिक लापरवाही या साजिश तो नहीं थी। मामले की जांच जारी है।
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श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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